सिलवानी। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किसानों को राहत देने के उद्देश्य से समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी की जा रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सांईखेड़ा स्थित मूंग उपार्जन केंद्र पर अव्यवस्थाओं और अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त सामने आ रही है, जिससे किसान परेशान हैं।
यहाँ तैनात समिति प्रबंधक, सर्वेयर और बेयर हाउस संचालक मिलकर किसानों के साथ खुला धोखा कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, ग्राम सांईखेड़ा में रघुकुल बेयर हाउस को मूंग उपार्जन केंद्र बनाया गया है, जो सेवा सहकारी समिति सांईखेड़ा के अंतर्गत आता है। यहीं पंजीकृत किसान अपनी मूंग उपज तौलवा रहे हैं, लेकिन तौल प्रक्रिया में नियमों की जमकर अनदेखी हो रही है।
तय मानक से अधिक हो रही मूंग की तौल, किसानों से जबरन ली जा रही अतिरिक्त उपज
सरकार की गाइडलाइन के अनुसार प्रति बोरी मूंग का वजन अधिकतम 50 किलो 600 ग्राम होना चाहिए। लेकिन किसानों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि यहां प्रति बोरी 50 किलो 800 ग्राम से लेकर 950 ग्राम तक तौल की जा रही है।
जब किसान इस अतिरिक्त तौल पर सवाल उठाते हैं, तो सर्वेयर मूंग को अमानक बताकर तौलने से इंकार कर देते हैं। ऐसे में मजबूर किसान तय मात्रा से अधिक मूंग तौलवाने को विवश हो जाते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अव्यवस्थाओं से जूझ रहे किसान, न पानी की व्यवस्था, न पार्किंग का इंतजाम
उपार्जन केंद्र पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। यहां न तो किसानों के लिए पीने के पानी की सुविधा है और न ही वाहनों की पार्किंग का कोई पुख्ता इंतजाम। गीली ज़मीन और दलदल के चलते परिसर में फिसलने का खतरा बना रहता है। कई बार किसानों को ट्रैक्टर और ट्रॉली लेकर घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता है, जिससे उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
प्रशासनिक निरीक्षण महज़ औपचारिकता, नहीं हो रही ठोस कार्रवाई
हालांकि प्रशासनिक अधिकारी समय-समय पर उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करते हैं, लेकिन इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होने से यह शक और गहरा हो जाता है कि कहीं ना कहीं ऊपर तक मिलीभगत का खेल चल रहा है।
किसानों का कहना है कि समिति प्रबंधक, सर्वेयर और बेयर हाउस संचालक की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है, जिससे उनकी मेहनत की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
क्या बोले किसान?
एक किसान ने बताया, “हमारे साथ रोज़ धोखा हो रहा है। न सही तौल होती है, न सुविधा मिलती है। जो सवाल पूछो तो मूंग को अमानक बताकर वापस कर देते हैं। मजबूरी में चुप रहना पड़ता है।”
अब क्या आगे?
प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले में सख्ती से संज्ञान ले और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। किसानों की मेहनत का सही मूल्य देना सरकार की जिम्मेदारी है, और उसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती