कोंडागांव। organic fertilizer किसानों की जिंदगी संवारने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जब इन योजनाओं को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी और कर्मचारी ही लापरवाह हो जाएं, तो मेहनतकश किसानों को उसका फायदा कैसे मिलेगा? ऐसा ही एक मामला कोंडागांव जिले के ग्राम मुनगापदर से सामने आया है, जहां कृषि विभाग की लापरवाही के कारण किसानों तक दवाई और जैविक खाद नहीं पहुंच पाई।
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मामले का खुलासा तब हुआ जब गांव के एक जागरूक युवक पीला सिंह पोयाम ने रखी हुई खराब दवाई और खाद का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। organic fertilizer
खेतों तक नहीं पहुंच पाई जैविक खाद और दवाइयां
जानकारी के अनुसार, शासन की ओर से किसानों को जैविक खाद और कृषि दवाइयां वितरण के लिए भेजी गई थीं। लेकिन ग्राम मुनगापदर में इन सामग्रियों को समय पर हितग्राहियों को नहीं बांटा गया। नतीजा यह हुआ कि ये सामग्री महीनों तक गोदाम में रखी-रखी खराब हो गई। कई बोरे और दवाई के कंटेनर अब अनुपयोगी हो चुके हैं। organic fertilizer
किसानों का कहना है कि अगर समय पर खाद और दवाइयां मिल जातीं, तो उनकी फसलों में काफी सुधार होता और नुकसान से बचा जा सकता था। अब जब सामग्री बेकार हो चुकी है, तो किसानों का भरोसा विभाग पर से उठता नजर आ रहा है। organic fertilizer
जागरूक युवक ने किया खुलासा, वायरल हुआ वीडियो
गांव के ही निवासी पीला सिंह पोयाम ने बताया कि उसने जब देखा कि खाद और दवाइयां लंबे समय से वितरण के बिना रखी हुई हैं, तो उसे शक हुआ। जांच करने पर मालूम पड़ा कि यह सामग्री किसानों के लिए आई थी, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते किसी को नहीं दी गई। इसके बाद उसने सच्चाई का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। organic fertilizer
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कई थैले और कंटेनर खराब हालत में पड़े हैं। कुछ बोरे फट चुके हैं, तो कुछ में नमी लग चुकी है। यही नहीं, कुछ दवाइयों की एक्सपायरी डेट भी निकल चुकी है। organic fertilizer
किसानों में नाराजगी, बोले – ‘हमसे वादा किया पर फायदा नहीं मिला’
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग के अधिकारी हर साल योजनाओं का वादा तो करते हैं, लेकिन जब जरूरत होती है, तब किसान अकेले रह जाते हैं। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने इस बारे में कृषि विभाग के स्थानीय कर्मचारियों से भी शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। organic fertilizer
एक किसान ने कहा, “सरकार किसानों की भलाई के लिए कितनी ही योजनाएं बनाए, अगर उन्हें सही समय पर लागू नहीं किया गया तो सब बेकार है।” organic fertilizer
अधिकारियों ने नहीं उठाया फोन, विभाग की चुप्पी बरकरार
इस मामले में जब मीडिया द्वारा उपसंचालक कृषि कोंडागांव टीपी टांडे से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। उनकी ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान भी नहीं दिया गया है। इससे यह साफ झलकता है कि विभाग इस लापरवाही पर जवाब देने से बच रहा है।
ग्रामीणों की मांग है कि इस मामले में जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
शासन की योजनाएं कागजों में सीमित
यह कोई पहला मामला नहीं है। राज्य के कई इलाकों से आए दिन ऐसी शिकायतें सामने आती रहती हैं, जहां किसान योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे। कभी खाद वितरण में देरी होती है, तो कभी सिंचाई या बीज की व्यवस्था समय पर नहीं होती। शासन के करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद नतीजे धरातल पर दिखाई नहीं देते।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कृषि विभाग समय पर योजनाओं का क्रियान्वयन करे और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, तो किसान न सिर्फ आत्मनिर्भर बन सकते हैं बल्कि उत्पादन में भी इजाफा होगा। organic fertilizer
अब किसान कर रहे कार्रवाई की मांग
ग्राम मुनगापदर के किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि वे मौके पर जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में किसानों के लिए आई सामग्री समय पर बांटी जाए। किसानों ने यह भी कहा कि अगर जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया तो वे सामूहिक रूप से कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपेंगे। organic fertilizer
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कुल मिलाकर यह मामला बताता है कि अगर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही जारी रही, तो किसानों के हालात बदलने के बजाय और बिगड़ सकते हैं। जरूरत है कि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई हो और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए।