मध्य प्रदेश के सबसे छोटे जिले निवाड़ी (MP News) से एक बार फिर सरकारी कामकाज में लापरवाही और भ्रष्टाचार की कहानी सामने आई है। जिले के 27 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में बनाए गए शौचालयों को लेकर जो आशंका पहले से जताई जा रही थी, वह अब जांच रिपोर्ट में सही साबित हो गई है। करीब आठ महीने पंद्रह दिन तक चली जांच के बाद गठित जांच दल ने साफ तौर पर माना है कि इन स्कूलों में बने शौचालयों का निर्माण गुणवत्ताहीन है और कई जगहों पर गंभीर खामियां पाई गई हैं।
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दरअसल, निवाड़ी जिले के शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए सर्व-सुविधायुक्त शौचालयों का निर्माण कराया गया था। इस पूरे प्रोजेक्ट पर कुल 84 लाख 30 हजार रुपये खर्च किए गए। जानकारी के अनुसार, एक माध्यमिक विद्यालय में बने शौचालय की लागत लगभग 2 लाख 93 हजार रुपये, जबकि एक प्राथमिक विद्यालय में बने शौचालय की लागत 2 लाख 73 हजार रुपये तय की गई थी। इतने बड़े बजट के बावजूद निर्माण कार्य की गुणवत्ता सवालों के घेरे में आ गई। (MP News)
पहले से उठ रहे थे सवाल, अब जांच में हुई पुष्टि
स्थानीय स्तर पर इन शौचालयों के निर्माण को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं। कहीं दीवारों में दरारें थीं, तो कहीं घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। कई स्कूलों में शौचालय उपयोग की स्थिति में ही नहीं थे। मामला बढ़ने पर जिला पंचायत ने इसे गंभीरता से लिया और 4 अप्रैल 2025 को एक चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया। (MP News)
जांच दल ने जिले के अलग-अलग स्कूलों में जाकर शौचालयों के निर्माण कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया। टीम ने न केवल निर्माण की गुणवत्ता देखी, बल्कि खर्च की गई राशि और कार्य की वास्तविक स्थिति का भी मिलान किया। करीब आठ माह 15 दिन तक चली इस लंबी जांच के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट जिला पंचायत सीईओ को सौंप दी। (MP News)
जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया?
जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि कई स्कूलों में शौचालयों का निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। दीवारों की मोटाई, प्लास्टर, फर्श, पानी की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं में भारी खामियां पाई गईं। कुछ निर्माण कार्यों पर तो जांच दल ने सीधे प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। (MP News)
हैरानी की बात यह है कि जांच से पहले ही विभाग के एक सब इंजीनियर ने स्वीकार किया था कि शौचालयों के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। इसके बावजूद काम पूरा कर भुगतान किया गया, जो अब पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। (MP News)
जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज
मामले को लेकर जिला पंचायत सीईओ ने (MP News) स्पष्ट कहा है कि शौचालय निर्माण में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोषी पाए जाने वालों से रिकवरी की जाएगी और साथ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
सीईओ का कहना है कि बच्चों की सुविधा और स्वच्छता से जुड़ा यह मामला बेहद गंभीर है। सरकारी पैसे का सही उपयोग होना चाहिए और यदि इसमें गड़बड़ी पाई जाती है, तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। (MP News)
बच्चों की सुविधा से समझौता
इन शौचालयों का निर्माण खासतौर पर विद्यार्थियों की स्वच्छता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर किया गया था। लेकिन घटिया निर्माण के कारण न केवल सरकारी धन की बर्बादी हुई, बल्कि बच्चों की सुविधा से भी सीधा समझौता किया गया। कई स्कूलों में छात्र-छात्राएं आज भी शौचालयों का उपयोग करने से कतराते हैं। (MP News)
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अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में ऐसे निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी या नहीं। (MP News)