सागर जिले में इस बार किसानों ने बड़े पैमाने पर मक्का की बुवाई की है, लेकिन अब फसल की बढ़वार के अहम समय में उन्हें यूरिया खाद की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। खाद न मिलने से अन्नदाता बेहद परेशान हैं। बारिश के बाद फसल को खाद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन बाजार और सरकारी गोदामों में यूरिया की उपलब्धता ना के बराबर है।
स्थिति ये है कि जैसे ही किसानों को सूचना मिलती है कि जिले के डबल लॉक गोदामों में खाद पहुंची है, वे सुबह-सुबह ही लंबी कतारों में लग जाते हैं। रहली, देवरी, गढ़ाकोटा और केसली ब्लॉक के किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं।
टोकन मिलने के बाद भी नहीं मिल रहा खाद
किसानों को प्रशासन की ओर से टोकन बांटे जा रहे हैं, ताकि व्यवस्थित तरीके से खाद वितरित किया जा सके। लेकिन हकीकत ये है कि टोकन मिलने के बावजूद भी किसानों को यूरिया नहीं मिल पा रही। ऐसे में किसानों में नाराजगी और गुस्सा दोनों है। कुछ किसान तो सुबह 4 बजे से लाइन में लग जाते हैं, लेकिन फिर भी खाली हाथ लौटना पड़ता है।
कई जगहों पर हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि पुलिस की मौजूदगी में खाद वितरण कराया जा रहा है। लेकिन जब दो से तीन टन यूरिया ही गोदामों में आता है, तो उससे हजारों किसानों की जरूरत कैसे पूरी हो सकती है?
पूर्व मंत्री का सरकार पर हमला
इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। पूर्व मंत्री हर्ष यादव ने कहा कि “किसानों को सरकार ना तो खाद दे पा रही है, और ऊपर से पुलिस की लाठियां खाने पर मजबूर कर रही है। किसान घंटों लाइनों में लगते हैं, लेकिन फिर भी खाली हाथ लौटते हैं। ये बेहद शर्मनाक है।”उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार दावा करती है कि खाद का पर्याप्त भंडारण है, तो फिर किसान परेशान क्यों हैं? आखिर ये खाद कहां जा रही है? कहीं ब्लैक मार्केटिंग तो नहीं हो रही?
खाद की कमी से फसल पर खतरा
जानकारों का कहना है कि मक्का की फसल को 25 से 30 दिन की अवस्था में यूरिया की सख्त जरूरत होती है। अगर इस समय खाद न मिले तो फसल की बढ़वार रुक सकती है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। इससे न केवल किसानों को घाटा होगा, बल्कि आने वाले समय में खाद्यान्न संकट की स्थिति भी बन सकती है।
सरकारी इंतजाम फेल, किसान हो रहा बेहाल
प्रशासन की ओर से भले ही दावे किए जा रहे हों कि हर ब्लॉक में खाद पहुंचाई जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। डबल लॉक गोदामों में सीमित मात्रा में खाद भेजी जा रही है, जिससे केवल कुछ ही किसानों को खाद मिल पाती है। बाकी किसान मायूस होकर लौट जाते हैं।
कुछ किसान तो यह भी आरोप लगा रहे हैं कि गोदामों से खाद बाहर निकलकर प्राइवेट दुकानों में ज्यादा दाम पर बिक रही है। ऐसे में गरीब और छोटे किसान के लिए खाद खरीदना और भी मुश्किल हो गया है।
किसानों की मांग: जल्द उपलब्ध कराई जाए यूरिया
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले में अतिरिक्त यूरिया खाद भेजी जाए, ताकि उनकी फसल बचाई जा सके। साथ ही, खाद वितरण की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने की मांग भी उठ रही है।
निष्कर्ष:
सागर जिले में किसानों की परेशानी दिन-ब-दिन बढ़ रही है। यूरिया की किल्लत ने उनके सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। अगर जल्द ही यूरिया की आपूर्ति नहीं की गई, तो मक्का की फसल पर बुरा असर पड़ सकता है और किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।