मंडीदीप/सतलापुर। उद्योग नगरी मंडीदीप में शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने फिर से औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए। सतलापुर थाना क्षेत्र स्थित GTV कंपनी में काम कर रहे 30 वर्षीय मजदूर प्रीतम नाथ, निवासी नूरगंज की लगभग 40 फीट ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हो गई। हादसे के समय वह बिना सुरक्षा उपकरणों (सेफ्टी हार्नेस, हेलमेट आदि) के ऊंचाई पर काम कर रहा था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
हादसा कैसे हुआ?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर करीब 2 बजे के आसपास प्रीतम ऊंचाई पर काम कर रहा था। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वह नीचे आ गिरा। मौके पर मौजूद साथियों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। प्रारंभिक जानकारी में साफ हुआ कि साइट पर पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध नहीं थे और मजदूर बिना किसी सेफ्टी गियर के ऊंचाई पर काम कर रहा था।
पुलिस का क्या कहना है?
एसडीओपी ओबेदुल्लागंज शीला सुराणा ने बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि हादसे के वक्त मजदूर के पास कोई भी सुरक्षा उपकरण नहीं था। उन्होंने कहा, “मजदूर पूरी तरह असुरक्षित स्थिति में ऊंचाई पर काम कर रहा था, जिससे यह हादसा हुआ।” अब पुलिस कंपनी प्रबंधन, साइट इंचार्ज और संबंधित ठेकेदार से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता चल सके कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कहां और किस स्तर पर हुई।
परिवार और साथियों का दर्द
हादसे के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने उचित सुरक्षा इंतज़ाम नहीं किए, जिसके चलते प्रीतम को अपनी जान गंवानी पड़ी। साथ काम करने वाले मजदूर भी कह रहे हैं कि उद्योग क्षेत्र में कई जगह बेसिक सेफ्टी रूल्स कागज़ों पर ही चलते हैं, ज़मीन पर नहीं।
नियमानुसार क्या जरूरी था?
औद्योगिक सुरक्षा मानकों के अनुसार,
40 फीट (या उससे अधिक) ऊंचाई पर काम के दौरान सेफ्टी हार्नेस, हेलमेट, लाइफलाइन और स्कैफोल्डिंग का प्रयोग अनिवार्य है।
साइट पर सेफ्टी सुपरवाइज़र की निगरानी, नियमित टूलबॉक्स मीटिंग और इमरजेंसी रेस्पॉन्स प्लान होना चाहिए।
वर्कर को सेफ्टी ट्रेनिंग देना और सेफ्टी गियर की उपलब्धता सुनिश्चित करना कंपनी/प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है।
अगर ये प्रोटोकॉल फॉलो होते, तो संभव है कि यह हादसा टाला जा सकता था।
प्रशासन से क्या अपेक्षा?
कंपनी की सेफ्टी ऑडिट तत्काल कराई जाए।
दोषी पाए जाने पर प्रबंधन/ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई हो।
परिवार को मुआवजा, नौकरी/आजीविका सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
मंडीदीप जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित सेफ्टी ड्राइव और निरीक्षण को अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए।
अब आगे क्या?
पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। प्रशासनिक स्तर पर भी औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े विभागों की भूमिका पर नजर है। यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि अगर उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो ऐसे हादसे फिर दोहराए जा सकते हैं।