उदयपुरा। नगर के प्रतिष्ठित स्वामी विवेकानंद कांवेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में हरियाली अमावस्या के मौके पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए कई गतिविधियाँ आयोजित कीं।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिसर में पौधारोपण के साथ हुई। इसमें छात्रों, शिक्षकों और समस्त स्टाफ ने मिलकर हिस्सा लिया। बच्चों ने अपने हाथों से पौधे लगाए और यह संकल्प लिया कि वे इन पौधों की देखभाल स्वयं करेंगे। इस पहल से बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना जागृत हुई।
विद्यालय संचालक गजेंद्र सिंह रघुवंशी ने इस मौके पर छात्रों से संवाद करते हुए पर्यावरण और हरियाली के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीना सीखना चाहिए, क्योंकि पेड़-पौधे सिर्फ ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि पर्यावरण को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिए कई प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। इनमें निबंध लेखन, चित्रकला और भाषण जैसी रचनात्मक गतिविधियाँ शामिल थीं। इन सभी प्रतियोगिताओं का विषय ‘हरियाली और पर्यावरण संरक्षण’ था। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए समाज को जागरूक करने वाला संदेश दिया।
विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि इस तरह के आयोजन छात्रों के समग्र विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण विषयों को समझना भी जरूरी है और हरियाली अमावस्या जैसे अवसर इस उद्देश्य को पूरा करने में सहायक होते हैं।
पौधारोपण कार्यक्रम के बाद विद्यालय परिसर में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी हुईं। बच्चों ने पर्यावरण पर आधारित गीत और कविताएं प्रस्तुत कर माहौल को हराभरा कर दिया। कार्यक्रम में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि प्रत्येक व्यक्ति को वर्ष में कम से कम एक पौधा जरूर लगाना चाहिए।
इस दौरान गजेंद्र सिंह रघुवंशी ने सभी को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई और जीवन में प्रकृति को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास बड़े बदलाव ला सकते हैं, बस जरूरत है निरंतरता और जागरूकता की।
विद्यालय परिवार और अभिभावकों की भागीदारी से यह कार्यक्रम सफल और प्रेरणादायक रहा। हरियाली अमावस्या का यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के लिए सीखने का अवसर बना, बल्कि पूरे समाज को एक सकारात्मक संदेश भी मिला।