सांदीपनि विद्यालय की ज़मीन पर लंबे समय से कब्जा कर दुकानों का संचालन कर रहे लोगों के लिए अब मुश्किलें बढ़ गई हैं। नगर परिषद सिलवानी ने इस भूमि पर कब्जा कर बैठे करीब 155 दुकानदारों को अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं।
नोटिस मिलते ही कब्जाधारियों में खलबली मच गई है। नगर परिषद ने साफ कहा है कि तीन दिन के अंदर कब्जा खुद हटाएं, वरना प्रशासन निकाय अधिनियम के तहत कार्रवाई करेगा और कब्जा तोड़ दिया जाएगा।
कौन दे रहा है नोटिस?
नगर परिषद के पांच कर्मचारी – राहुल कलोसिया, संजीव कलोसिया, सीताराम साहू, सतीश कुशवाहा और आरिफ खां – नोटिस बांटने का काम कर रहे हैं।
इन कर्मचारियों ने सभी कब्जाधारियों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस देकर चेतावनी दी है कि अगर तय समयसीमा में कब्जा नहीं हटाया गया तो जेसीबी चल सकती है।
क्यों हटाया जा रहा है अतिक्रमण?
नगर परिषद के मुताबिक सांदीपनि विद्यालय का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है।
यह ज़मीन विद्यालय की बाउंड्री वॉल के निर्माण के लिए ज़रूरी है, लेकिन कब्जे के कारण काम रुका हुआ है।
नगर परिषद ने स्पष्ट किया है कि जब तक अतिक्रमण नहीं हटेगा, तब तक निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सकेगा।
तीन दिन का अल्टीमेटम, फिर सख्त कार्रवाई
जारी नोटिस में लिखा है कि:
“यदि तीन दिवस के भीतर कब्जा नहीं हटाया गया तो नगर परिषद निकाय अधिनियम के तहत अतिक्रमण को बलपूर्वक हटाने की कार्रवाई करेगा, जिसकी ज़िम्मेदारी स्वयं कब्जाधारी की होगी।”
इस चेतावनी ने कब्जा कर बैठे व्यापारियों में घबराहट का माहौल बना दिया है। कई दुकानदारों ने आपस में चर्चा शुरू कर दी है कि अगला कदम क्या हो सकता है।
प्रशासन भी हुआ सक्रिय
इस कार्रवाई की जानकारी कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी को भी भेजी गई है। यानी कि प्रशासन ने भी अब इस मामले को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है।
संभावना जताई जा रही है कि आगामी दिनों में प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचकर कार्रवाई भी कर सकता है।
स्थानीय व्यापारियों की चिंता
अतिक्रमण की ज़मीन पर दुकान चला रहे कुछ व्यापारियों का कहना है कि उन्हें वर्षों से यहां व्यापार करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अब अचानक से हटाने की कार्रवाई उनके रोज़गार को प्रभावित करेगी।
हालांकि दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर ये जमीन स्कूल की है तो उसे कब्जा मुक्त करवाना ही सही कदम है, ताकि बच्चों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित परिसर तैयार हो सके।
स्थायी समाधान की उम्मीद
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि प्रशासन को अतिक्रमण हटाने से पहले इन दुकानदारों को वैकल्पिक जगह देने की व्यवस्था भी करनी चाहिए, जिससे किसी का रोजगार न छिने और विकास कार्य भी बाधित न हो।