सिलवानी में सांदीपनि विद्यालय की जमीन पर दुकान लगाकर बरसों से व्यापार कर रहे दुकानदार आज भारी बारिश के बीच तहसील कार्यालय पहुंचे। इन दुकानदारों को नगर परिषद (नप) की तरफ से अतिक्रमण हटाने के नोटिस मिले हैं, जिससे वे सभी परेशान हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें अपील की गई है कि अभी उनके अतिक्रमण न हटाए जाएं।
‘कई सालों से कर रहे व्यवसाय, परिवार का पेट कैसे भरेंगे?’
ज्ञापन में दुकानदारों ने बताया है कि वे कई सालों से सरकारी जमीन पर दुकानें बनाकर अपना रोज़गार चला रहे हैं, जिससे उनके परिवारों का गुज़ारा होता है। उनका कहना है कि वे हर दिन नगर परिषद को टैक्स भी देते हैं। लेकिन, अब नगर परिषद ने उन्हें अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिया है। दुकानदारों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर उनकी दुकानें हटा दी गईं, तो उनके सामने अपने परिवारों का पेट पालने की बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी।
एक दुकानदार ने बताया, “हम सालों से यहीं से कमा-खा रहे हैं। अब अगर इस बारिश के मौसम में हमें हटा दिया गया, तो हमारे बच्चे भूखे मरेंगे। हम कहां जाएंगे?”
‘बारिश में हटाना ठीक नहीं, प्रशासन चाहे तो पक्की दुकानें दे दे’
दुकानदारों ने ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया है कि अगर प्रशासन चाहे तो उन्हें उसी जगह पर पक्की दुकानें बनाकर आवंटित कर सकता है, और उनसे तय मासिक किराया भी ले सकता है। उनकी मुख्य मांग यह है कि कम से कम इस बरसात के मौसम में अतिक्रमण हटाना सही नहीं है, क्योंकि ऐसे में वे अपना सामान और परिवार लेकर कहां जाएंगे।
दुकानदारों ने यह सुझाव भी दिया कि बाउंड्री वॉल को उनकी दुकानों से थोड़ी दूर की खाली ज़मीन पर भी बनाया जा सकता है। इससे न सिर्फ़ उनका व्यापार चलता रहेगा, बल्कि विद्यालय की ज़मीन का भी इस्तेमाल हो सकेगा। उन्होंने अपनी बात बड़े अधिकारियों तक पहुँचाने के लिए, ज्ञापन की एक-एक कॉपी कलेक्टर, एसडीएम, और थाना प्रभारी को भी भेजी है।
नगर परिषद ने एक दिन पहले ही दिए थे नोटिस
दरअसल, नगर परिषद सिलवानी ने करीब 161 दुकानदारों को सांदीपनि विद्यालय की जमीन से अतिक्रमण हटाने के नोटिस बांटे हैं। इस अतिक्रमित भूमि पर बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जाना है, जिसके लिए नगर परिषद ने ये नोटिस जारी किए हैं। नोटिस मिलते ही दुकानदारों में हड़कंप मच गया था और तभी से वे कोई रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे थे।
एक स्थानीय पार्षद ने बताया कि विद्यालय की जमीन पर लंबे समय से अतिक्रमण था, और अब विकास कार्यों के लिए बाउंड्री वॉल बनाना ज़रूरी हो गया है। हालांकि, उन्होंने भी मानवीय आधार पर दुकानदारों की समस्या को समझने की बात कही।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे दुकानदार
बारिश के बावजूद, ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में दुकानदार तहसील कार्यालय में मौजूद रहे। सभी की आंखों में अपने रोज़गार छिन जाने का डर साफ दिख रहा था। उन्होंने एकजुट होकर अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखी और उम्मीद जताई कि उनकी बात सुनी जाएगी।
अब देखना यह होगा कि नगर परिषद और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या दुकानदारों को बारिश खत्म होने तक मोहलत मिलेगी, या उन्हें तत्काल अपनी दुकानें हटानी पड़ेंगी? यह मामला स्थानीय लोगों के रोज़गार और प्रशासन के विकास कार्यों के बीच एक संतुलन साधने की चुनौती पेश कर रहा है।