देवरी क्षेत्र की स्कूली बच्चियों को गुरुवार सुबह भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जब रम्पुरा रोड पर लगे जाम में वे करीब दो घंटे तक फंसी रहीं। सुबह 10 बजे स्कूल के लिए निकलीं ये छात्राएं, 12 बजे तक भी क्लास नहीं पहुंच पाईं। जाम का कारण बना एक मुरम से भरा ट्रैक्टर जो बीच सड़क में फंस गया, और करीब सौ ट्रैक्टरों की कतार ने हालात और बिगाड़ दिए।
दरअसल, इस समय देवरी के मां रेवा वेयरहाउस पर मूंग की तुलाई का कार्य चल रहा है। यह वेयरहाउस रम्पुरा रोड पर स्थित है, जहां किसानों की उपज तुलवाई के लिए लाई जाती है। लेकिन प्रधानमंत्री सड़क पर रोजाना दर्जनों ट्रैक्टर खड़े हो जाते हैं जिससे इलाके में आए दिन जाम की स्थिति बनती है।
गुरुवार को सुबह 9 बजे एक ट्रैक्टर सड़क के बीचोंबीच फंस गया, जिससे जाम लग गया। यह जाम इतना भयानक था कि दो गांवों को जोड़ने वाला यह इकलौता रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया। इसी रास्ते से कन्या शाला की छात्राएं भी स्कूल जाती हैं, जो जाम में फंसकर परेशान होती रहीं।
नर्मदा पाइपलाइन की खुदाई बनी जाम की बड़ी वजह
ग्रामीणों का कहना है कि यह जाम सिर्फ ट्रैक्टरों की वजह से नहीं, बल्कि सड़क की हालत भी जिम्मेदार है। देवरी क्षेत्र में 20 करोड़ की लागत से नर्मदा पाइपलाइन योजना के तहत रिछावर गांव से पानी पहुंचाया जा रहा है। श्याम कंस्ट्रक्शन नामक कंपनी द्वारा पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क की खुदाई की गई थी। लेकिन काम पूरा होने के बाद सड़क को दोबारा ठीक नहीं किया गया।
कंपनी ने सिर्फ मिट्टी डालकर सड़क छोड़ दी। ना मुरम डाला गया, ना सीमेंट। ऐसे में भारी वाहन या ट्रैक्टर उस गड्ढों से भरी सड़क पर फंसने लगते हैं और जाम की स्थिति बन जाती है। जब इस बारे में कंपनी के ठेकेदार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि “मैं मुरम डलवाकर रास्ता चालू करवा दूंगा।” लेकिन सवाल उठता है कि जब खुदाई हुई थी, तभी अगर सड़क की मरम्मत कर दी जाती तो आज इतनी बड़ी परेशानी सामने नहीं आती।
जाम खुलवाने के लिए एसडीएम तक लगानी पड़ी गुहार
स्थानीय लोगों ने जब जाम की सूचना नजदीकी अधिकारियों को दी तो कोई मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद बरेली एसडीएम संतोष मुद्गल को जानकारी दी गई। एसडीएम के हस्तक्षेप के बाद देवरी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालते हुए रास्ता खुलवाया।
छात्राओं को हो रही पढ़ाई में परेशानी
जाम में फंसी छात्रा दिव्या लोधी ने बताया, “मैं 12वीं कक्षा की छात्रा हूं। इस साल बोर्ड की परीक्षाएं हैं और हर दिन की पढ़ाई जरूरी है। लेकिन रोजाना जाम की वजह से समय पर स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। आज सुबह 10 बजे से जाम में फंसे हैं, अब 12 बजे स्कूल पहुंचेंगे तो जरूरी विषय की पढ़ाई छूट जाएगी।”
यह केवल दिव्या की परेशानी नहीं, बल्कि सैकड़ों छात्राओं और ग्रामीणों की साझा समस्या है। ग्रामीणों का कहना है कि जब से यह वेयरहाउस बना है, तब से हर साल जाम लगता है और अधिकारी पहले से जानकारी के बावजूद समय पर कोई व्यवस्था नहीं करते। जब हालात बिगड़ जाते हैं, तब अफसर मौके पर पहुंचते हैं।