मध्य प्रदेश के रायसेन जिले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर संकल्प मजबूत हो और टीम पूरी मेहनत से जुटी हो, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत रायसेन जिले ने जल संरक्षण की दिशा में शानदार काम करते हुए प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया है।
हालांकि खास बात यह रही कि अंकों के आधार पर रायसेन ने पूरे मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा 93.89 अंक हासिल किए, यानी कि अगर रैंकिंग सिर्फ अंकों पर होती, तो रायसेन पहले नंबर पर होता।
2500 से ज्यादा खेत तालाब और 23 अमृत सरोवर बने
30 मार्च से 30 जून तक चले इस अभियान के दौरान रायसेन जिले में 2500 से ज्यादा खेत तालाब और 23 अमृत सरोवरों का निर्माण कराया गया। इनसे 5000 एकड़ से ज्यादा जमीन सिंचित हो सकेगी, जिससे खेती-किसानी में सुधार होगा और जल संकट से राहत मिलेगी। सिर्फ इतना ही नहीं, जिले में 1687 कूप रिचार्ज पिट भी बनाए गए, जो भूजल स्तर को बढ़ाने में मददगार होंगे।
बेतवा नदी के उद्गम स्थल को फिर से जिंदा किया गया
इस अभियान में रायसेन जिले की बड़ी और सराहनीय पहल रही झिरी ग्राम में बेतवा नदी के उद्गम स्थल का पुनर्जीवन।
यह कार्य सतत प्रवाह और नदी संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम है। साथ ही अन्य नदियों के स्रोतों की पहचान कर उनका भी संरक्षण किया गया, ताकि आने वाले समय में जल संकट को रोका जा सके।
तकनीक और जनभागीदारी का भी रहा अहम योगदान
अभियान की खासियत यह रही कि इसमें तकनीकी साधनों का भी खूब इस्तेमाल किया गया।
SIPRI ऐप, SECURE पोर्टल और माय भारत ऐप के ज़रिए जल संरक्षण कार्यों का चिन्हांकन, स्वीकृति और निगरानी की गई। जिले में 15000 से ज्यादा ‘जलदूतों’ को ट्रेनिंग देकर जल संरक्षण के लिए तैयार किया गया। वहीं “पानी चौपाल” जैसे जागरूकता कार्यक्रमों के ज़रिए लोगों को इस मुहिम से जोड़ा गया और जनभागीदारी को बढ़ावा मिला।
C.E.O अंजू पवन भदौरिया ने टीम को दिया श्रेय
जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंजू पवन भदौरिया ने इस सफलता का श्रेय अपने सभी अधिकारी-कर्मचारियों की मेहनत और कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा की सतत मॉनिटरिंग को दिया। उनका कहना है कि, “रायसेन की यह सफलता पूरी टीम की मेहनत और जल संरक्षण के प्रति ईमानदार सोच का परिणाम है।” उनकी अगुआई में मनरेगा योजना के तहत गांव-गांव में जल संरक्षण कार्य कराए गए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट को दूर करने में बड़ी मदद मिली है।
भविष्य के लिए बनेगी मिसाल
राज्य स्तर पर 93.89 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचकर रायसेन ने साबित कर दिया कि ईमानदारी और मेहनत से जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, खासतौर पर ऐसे समय में जब जल संकट हर साल एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।