भारत सिंह मीणा रायसेन
रायसेन, मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में इस साल मूंग खरीदी में बड़ा गड़बड़झाला सामने आ रहा है। आरोप है कि मूंग की क्वालिटी चेक करने वाली ‘एनाकोंन कंपनी’ अपनी ज़िम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रही है। उपार्जन केंद्रों पर समिति, वेयरहाउस मालिक और कंपनी के सर्वेयर की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर अमानक (घटिया क्वालिटी की) मूंग खरीदी जा रही है। इसका सीधा नुकसान किसानों और आगे चलकर आम जनता को उठाना पड़ेगा।
क्वालिटी चेक में फेल हो रही एनाकोंन कंपनी?
प्रदेश सरकार ने किसानों की परेशानियों को देखते हुए इस साल मूंग खरीदने का फैसला किया था। इसके लिए सख्त नियम और मापदंड भी तय किए गए थे, ताकि किसानों को उनकी अच्छी उपज का सही दाम मिले और सरकार को भी गुणवत्ता वाली मूंग मिले। इस काम के लिए बाकायदा टेंडर निकालकर क्वालिटी चेक का ज़िम्मा ‘एनाकोंन कंपनी’ को दिया गया था।
लेकिन, ज़मीनी स्तर पर उपार्जन केंद्रों पर यह कंपनी पूरी तरह से फेल साबित हो रही है। सूत्रों की मानें तो, समिति और वेयरहाउस मालिकों के साथ कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते यह खेल चल रहा है। कंपनी के प्रतिनिधि बिना ठीक से जांच किए और लालच में आकर घटिया मूंग को भी ‘पास’ कर रहे हैं। बाद में इसी मूंग की तुलाई करके उसका भंडारण किया जा रहा है।
महाकाल वेयरहाउस, साइखेड़ा में नियुक्त एनाकोंन कंपनी के प्रतिनिधि देवेंद्र दांगी से जब अमानक मूंग खरीदने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसकी ज़िम्मेदारी समिति पर डाल दी और अपना “डर” ज़ाहिर किया। यह डर ही कहीं न कहीं मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
डर और लालच का खेल: मापदंडों की उड़ रही धज्जियां
कई केंद्रों पर तो यह भी आरोप लग रहे हैं कि राजनीतिक दबाव और वेयरहाउस मालिक व प्रबंधकों के लालच के चलते कंपनी के प्रतिनिधि अमानक मूंग को भी पास कर रहे हैं। उपार्जन नीति और नेफेड (NAFED) द्वारा तय किए गए मापदंडों का खुले तौर पर उल्लंघन किया जा रहा है।
खरीदी के मापदंड क्या कहते हैं?
सरकार ने मूंग खरीदी के लिए कई मापदंड तय किए हैं। सबसे पहला है अच्छी क्वालिटी की मूंग की पहचान करना। इसके लिए ही कंपनी को टेंडर दिया जाता है। कंपनी के प्रतिनिधि को यह जांचना होता है कि मूंग में तय मात्रा से ज़्यादा कचरा, मिट्टी, नमी या कतरन (टूटी हुई दाल) तो नहीं है, जिससे नुकसान न हो। अगर मूंग में ज़्यादा नमी, कचरा या मिट्टी होती है, तो उसे सफाई यानी ग्रेडिंग कराने के बाद ही खरीदा जाता है।
वज़न बढ़ाने के लिए मूंग में मिलाई जा रही मिट्टी और कचरा!
कुछ उपार्जन केंद्रों पर तो मूंग की खरीदी के दौरान वज़न बढ़ाने के लिए बाकायदा मिट्टी मिली हुई मूंग भी देखी जा सकती है। यह सीधे-सीधे धोखाधड़ी है, जो किसानों के साथ-साथ सरकार को भी नुकसान पहुंचा रही है।
अमानक मूंग से सेहत को खतरा: कीड़े पड़ने की आशंका
मूंग की फसल में अगर तय मात्रा से ज़्यादा नमी होती है, तो भंडारण के बाद उसमें कीड़े पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। ये कीड़े मूंग को खराब कर देते हैं और कई तरह के केमिकल छोड़ते हैं, जो इंसान के शरीर के लिए बहुत हानिकारक हो सकते हैं। जब यही घटिया मूंग बाद में आम जनता की थाली में परोसी जाएगी, तो उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
किसान परेशान: केंद्रों पर नहीं है ग्रेडिंग की व्यवस्था
एक तरफ तो अमानक मूंग खरीदी जा रही है, वहीं दूसरी ओर उन आम किसानों को परेशानी हो रही है, जिनके पास अच्छी क्वालिटी की मूंग है। कई केंद्रों पर तो मूंग की सफाई (ग्रेडिंग) तक की व्यवस्था नहीं है। जबकि, किसानों को परेशानी न हो इसके लिए केंद्रों पर ग्रेडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसान अपनी उपज को साफ करके समर्थन मूल्य पर सरकार को बेच सकें। रायसेन के कई केंद्रों पर इस व्यवस्था के न होने से किसान परेशान हो रहे हैं।
NCCF अधिकारी ने जांच का आश्वासन दिया, कंपनी के बड़े अधिकारी नदारद!
रायसेन जिले में हो रहे उपार्जन, किसानों की परेशानी और एनाकोंन कंपनी की लापरवाही के संबंध में NCCF (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) की अधिकारी अपर्णा सिंह से बात की गई, तो उन्होंने जांच कर कार्रवाई करने की बात कही है। वहीं, कंपनी प्रतिनिधियों द्वारा की जा रही लापरवाही के संबंध में जब कंपनी के सुपरवाइजर और डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर को कई बार फोन लगाया गया, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। यह चुप्पी उनकी मिलीभगत की ओर साफ इशारा करती है।
इस पूरे मामले से यह साफ है कि मूंग खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इसका सीधा खामियाजा ईमानदार किसानों और अंततः उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है।