सिलवानी, 18 जुलाई 2025।
बच्चों को नशे से बचाने और उन्हें जागरूक करने के उद्देश्य से सिलवानी पुलिस द्वारा एक विशेष जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को नगर के पुष्पा विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए एक प्रभावशाली नशा मुक्ति कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में टीआई पूनम सविता ने बच्चों से सीधा संवाद कर उन्हें नशे के खतरे और मोबाइल व सोशल मीडिया की लत के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम में करीब 150 छात्र-छात्राएं और शिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने पूरे ध्यान और गंभीरता के साथ पुलिस की बातें सुनीं और समझने की कोशिश की कि कैसे छोटी-छोटी आदतें कब जानलेवा लत बन जाती हैं।
बच्चों को सिखाया नशे से कैसे बचें
टीआई पूनम सविता ने बच्चों को आसान भाषा में समझाया कि नशा सिर्फ शराब, सिगरेट या गुटखा तक सीमित नहीं है। आज के समय में मोबाइल और सोशल मीडिया की लत भी एक तरह का नशा बन चुकी है। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों और रोज़मर्रा की जिंदगी से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को बताया कि ये आदतें कैसे धीरे-धीरे उनके मन, शरीर और भविष्य पर बुरा असर डाल सकती हैं।
उन्होंने कहा –
“शुरुआत में नशा या आदतें छोटी लगती हैं, लेकिन जब ये लगातार होती हैं तो आदत बन जाती हैं, और आदत कब लत बन जाए, पता ही नहीं चलता। इसीलिए जरूरी है कि आप खुद पर नियंत्रण रखें और अपने साथियों को भी सही राह पर चलने के लिए प्रेरित करें।”
पुलिस की अनोखी पहल
इस अभियान के पीछे मकसद सिर्फ कानून लागू करना नहीं, बल्कि समाज को शिक्षित करना और नई पीढ़ी को मजबूत बनाना है। टीआई पूनम सविता ने कहा कि जब एक बच्चा नशे की ओर बढ़ता है, तो सबसे पहले उसके व्यवहार में बदलाव आने लगता है — जैसे चिड़चिड़ापन, एकांत पसंद करना या पढ़ाई से दूरी बनाना। ऐसे समय में अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे समय रहते बच्चों को समझाएं और उनका सही मार्गदर्शन करें।
मोबाइल और सोशल मीडिया की लत भी खतरनाक
टीआई ने बच्चों को विशेष रूप से आगाह किया कि आजकल के मोबाइल गेम्स, रील्स, चैटिंग और देर रात तक स्क्रीन पर बिताया गया समय उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए उतना ही नुकसानदेह है जितना की नशे के अन्य रूप। उन्होंने यह भी बताया कि इससे बच्चों की एकाग्रता, नींद, और भावनात्मक संतुलन पर सीधा असर पड़ता है।
छात्रों और शिक्षकों ने की सराहना
कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्रों और शिक्षकों ने पुलिस के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि इस तरह की पहलें नियमित रूप से होनी चाहिए ताकि बच्चों को समय-समय पर जीवन की दिशा दिखती रहे।
विद्यालय के एक शिक्षक ने कहा –
“बच्चों को यह बातें किताबों से नहीं बल्कि ऐसे जीवन से जुड़े उदाहरणों से ज्यादा असर करती हैं। पुलिस का यह प्रयास बहुत प्रशंसनीय है।”