मोबाइल पर बात करते समय सड़क हादसा, गाडरवारा के SI नीलेश बड़कुर की गई जान
रायसेन एक दर्दनाक हादसे ने पूरे पुलिस महकमे और एक परिवार को गमगीन कर दिया। नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर नीलेश बड़कुर की एक सड़क दुर्घटना में मौके पर ही मौत हो गई। हादसा बरेली के नजदीक नेशनल हाईवे-45 पर बटेरा गांव के पास हुआ, जब वो मोबाइल पर बात करते हुए सड़क किनारे खड़े थे।
क्या हुआ उस रात?
जानकारी के अनुसार, SI नीलेश बड़कुर एक धोखाधड़ी के मामले की जांच के सिलसिले में राजगढ़ गए हुए थे। वापसी में भोपाल से ट्रेन छूट जाने के कारण उन्होंने बस से बरेली तक का सफर तय किया। रात काफी हो चुकी थी, इसलिए वो उदयपुरा स्थित अपने पिता के घर जाने के लिए सड़क किनारे वाहन का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान वो किसी से फोन पर बात कर रहे थे, और तभी एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। हादसा इतना जोरदार था की मौके पर ही मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया?
हादसे के चश्मदीदों का कहना है कि नीलेश मोबाइल पर बात कर रहे थे और उन्हें पीछे से आ रही गाड़ियों की आवाज तक सुनाई नहीं दी। यह एक ऐसा पल था जिसने एक जिंदादिल इंसान को हमसे छीन लिया।
परिवार में मचा कोहराम
नीलेश बड़कुर का परिवार गाडरवारा में रहता है। उनके पांच साल की एक बेटी और सात महीने का बेटा है। उनके पिता जी उदयपुरा में रहते हैं और रिटायर्ड हैं। जैसे ही हादसे की खबर परिवार को मिली, पूरे परिवार में मातम छा गया। उदयपुरा और गाडरवारा में लोगों की आंखें नम हो गईं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि नीलेश एक ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और संवेदनशील इंसान थे। ड्यूटी के साथ-साथ वो आम लोगों की मदद करने में भी हमेशा आगे रहते थे।
मोबाइल पर बात करना बना जानलेवा
यह हादसा एक कड़वा सच भी उजागर करता है — मोबाइल पर बात करते हुए सड़क पर खड़ा होना या चलना कितना खतरनाक हो सकता है। आजकल के व्यस्त जीवन में हम सब यह छोटी सी गलती कर बैठते हैं, लेकिन इसके परिणाम कभी-कभी जानलेवा साबित होते हैं।
पुलिस जांच में जुटी
बरेली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अज्ञात वाहन की तलाश की जा रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि वाहन और उसके चालक की पहचान की जा सके।
समाज ने एक अच्छा इंसान खो दिया
इस हादसे ने सिर्फ एक पुलिस अधिकारी को नहीं छीना, बल्कि एक पिता, एक पति और एक बेटे को भी छीन लिया। पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। हर कोई यही कह रहा है कि नीलेश जैसे अफसर बहुत कम होते हैं – जो कर्तव्य और इंसानियत दोनों को साथ लेकर चलते हैं।