देवरी क्षेत्र में मौसम का मिजाज फिर से बिगड़ गया है। पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर तेज बारिश हो रही है, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। शनिवार शाम करीब 5 बजे से बारिश ने एक बार फिर तेज रफ्तार पकड़ी, और इसी बारिश के बीच किसान अपनी उपज लेकर ट्रैक्टर में बैठे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
केंद्र सरकार की समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी योजना तो शुरू हुई है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। देवरी क्षेत्र में केवल तीन वेयरहाउस बनाए गए हैं, जिनमें जगह की भारी कमी है। ऐसे में एक बार में सिर्फ 8 से 10 ट्रैक्टर ही अनाज खाली कर पा रहे हैं, जबकि 700 से 800 ट्रैक्टर पहले से लाइन में खड़े हैं। किसान दिन-रात ट्रैक्टर पर ही रहकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
लाइन में बुकिंग की तारीख भी निकल गई, किसानों में बेचैनी
कई किसानों की स्लॉट बुकिंग की तारीख भी बारिश और देरी के चलते निकल गई है। अब वे असमंजस में हैं कि उनकी उपज की तुलाई कब होगी। न तो अभी तक शासन की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश आया है और न ही व्यवस्था को सुधारने की पहल की गई है। ऐसे में किसानों का कहना है कि सरकार ने अगर मूंग खरीदी की योजना शुरू की थी, तो पहले पर्याप्त वेयरहाउस की व्यवस्था करनी चाहिए थी।
हर रोज़ बढ़ रही ट्रैक्टरों की संख्या
जैसे-जैसे बारिश रुकती है, और किसान अपनी बारी के इंतजार में ट्रैक्टर लेकर पहुंचते हैं, वेयरहाउस पर ट्रैक्टरों की भीड़ और बढ़ जाती है। लेकिन रोज़ाना 10 से 12 ट्रैक्टर ही अनाज खाली कर पा रहे हैं, जिससे शेष किसानों को फिर अगली रात बितानी पड़ती है। कई किसान 10-15 दिनों से इसी लाइन में लगे हुए हैं और बारिश में भीगते हुए ट्रैक्टर पर ही रात काट रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन ने जताई नाराज़गी
भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष मुकेश शर्मा ने इस पूरी स्थिति पर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा, “किसानों की हालत दिन-ब-दिन खराब हो रही है। शासन को चाहिए कि देवरी क्षेत्र में और वेयरहाउस बनाए जाएं ताकि सभी किसानों की मूंग की तुलाई समय पर हो सके। 15 दिन से किसान लाइन में खड़े हैं, यह किसी भी सरकार के लिए शर्मनाक स्थिति है।”
किसानों की मांग – मिले राहत और समाधान
किसानों का साफ कहना है कि जब सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदी का एलान करती है, तो उसे पूरी व्यवस्था पहले से तैयार रखनी चाहिए। किसानों की मेहनत से उगाई गई मूंग अगर खुले में पड़ी रही या बारिश में भीग गई तो उनका नुकसान कौन भरेगा?
अब आगे क्या?
अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। किसान मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द अस्थायी या स्थायी रूप से और वेयरहाउस बनाए जाएं, ताकि सभी की उपज समय पर तुल सके और उन्हें राहत मिल सके। बारिश के इस दौर में यदि कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो देवरी क्षेत्र के किसान आंदोलन के रास्ते पर भी जा सकते हैं।