रायसेन, मध्यप्रदेश।
सावन का महीना आते ही भगवान शिव की भक्ति में डूबे रायसेन जिले के धनियाखेड़ी गांव के युवाओं ने एक नई परंपरा की शुरुआत की है। गांव के करीब 50 से 60 युवक और बुजुर्गों की टोली नर्मदापुरम के पवित्र नर्मदा तट से जल भरकर कांवड़ यात्रा पर निकली है। ये सभी पैदल चलते हुए रायसेन लौट रहे हैं। यह आस्था से भरी यात्रा करीब 4 से 5 दिन चलेगी और इसका समापन धनियाखेड़ी गांव के शिव मंदिर में होगा, जहां पूरे 156 लीटर नर्मदा जल से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया जाएगा।
गांव से शुरू हुई बड़ी आस्था की यात्रा
इस कांवड़ यात्रा का आयोजन धनियाखेड़ी गांव से पहली बार किया गया है, और यह भावनात्मक रूप से पूरे गांव के लिए गौरव की बात बन चुकी है। भोले के भक्तों की टोली नर्मदापुरम से चलकर अब्दुल्लागंज, मंडीदीप, बगरसिया और खरबाई होते हुए रायसेन पहुंचेगी। यहां से होते हुए यात्रा अपने अंतिम पड़ाव, यानी धनियाखेड़ी गांव के मंदिर तक पहुंचेगी।
शिवभक्ति में लीन दिखे युवा
यात्रा में शामिल युवाओं में गजब का उत्साह देखने को मिला। कोई नंगे पांव चल रहा है, तो किसी के पैरों में छाले पड़े हैं, फिर भी शिवभक्ति का जोश कम नहीं हुआ। हर कोई “हर हर महादेव” के जयकारों के साथ चल रहा है। इस भक्तिभाव ने राह चलते लोगों को भी प्रेरित किया।
हर जगह हुआ जोरदार स्वागत
जिन-जिन स्थानों से यह कांवड़ यात्रा गुजरी, वहां लोगों ने शिवभक्तों का स्वागत फूलों की वर्षा से किया। जगह-जगह यात्रियों के लिए विश्राम और जलपान की व्यवस्था की गई। कई श्रद्धालुओं ने रास्ते में रुककर कांवड़ यात्रियों की सेवा भी की।
156 लीटर नर्मदा जल से होगा शिव अभिषेक
इस यात्रा का मुख्य आकर्षण है — 156 लीटर नर्मदा जल से भगवान शिव का अभिषेक। यह जल भक्तजन अपनी कांवड़ में लेकर आ रहे हैं, और इसे विशेष पूजन के साथ शिवलिंग पर अर्पित किया जाएगा। यह दृश्य पूरे गांव के लिए एक दिव्य क्षण होगा।
यात्रा से जुड़ी श्रद्धा और भावना
धनियाखेड़ी गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस यात्रा से गांव में एक नई धार्मिक परंपरा की नींव रखी गई है। पहले कभी गांव से इतनी बड़ी संख्या में भक्त कांवड़ लेकर नहीं निकले थे। यह एक ऐसा क्षण है जो आने वाले सालों में और भी व्यापक रूप ले सकता है।
गांव का गौरव बनी कांवड़ यात्रा
धनियाखेड़ी के लोगों के लिए यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक गर्व और पहचान का विषय बन चुकी है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इसमें किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। गांव की महिलाएं भी पूजा-पाठ और स्वागत में भाग ले रही हैं।