उत्तर प्रदेश सरकार की नई खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 की वजह से राज्य में निवेश की लहर आ गई है। हाल ही में लखनऊ में हुई एक बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए, जिससे यह साफ हो गया है कि अब यूपी निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है। इस खबर में हम आपको बताएंगे कि कैसे इस नीति ने निवेशकों को आकर्षित किया है और इसका फायदा यूपी के किसानों और युवाओं को कैसे मिलेगा। (Investment of ₹300 crore in food cooperative sector in Uttar Pradesh: Farmers will benefit. UP Food Processing Policy 2023)
रामपुर में 300 करोड़ का निवेश, हरियाणा-गुजरात के उद्यमी हुए प्रभावित
क्या आप जानते हैं कि गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड के उद्यमी अब यूपी के रामपुर में करीब 300 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश करने जा रहे हैं? यह निवेश सिर्फ एक प्रोजेक्ट में नहीं, बल्कि कई अलग-अलग खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में किया जाएगा। इन इकाइयों में मटर, गाजर, गोभी, पालक और मशरूम जैसी सब्जियों का प्रसंस्करण होगा। इससे न सिर्फ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि स्थानीय किसानों को भी उनकी फसल का सही दाम मिलेगा।
यह निवेशकों का यूपी पर भरोसा दिखाता है। खासकर, रामपुर और बरेली जिले फ्रोजेन फूड प्रोसेसिंग का बड़ा हब बनकर उभरे हैं। इन जिलों में बड़े-बड़े उद्यमी जमीन लीज पर लेकर अपनी यूनिट लगा रहे हैं। हर यूनिट को औसतन 60 हजार क्विंटल फल और सब्जियों की जरूरत होगी, जो यूपी में ही आसानी से उपलब्ध है।
700 करोड़ के प्रस्तावों को मिली मंजूरी, 150 करोड़ का अनुदान
राज्य स्तरीय इम्पावर्ड कमेटी की एक अहम बैठक में 700 करोड़ रुपये के 52 प्रस्तावों को हरी झंडी मिल गई है। इन प्रस्तावों पर करीब 150 करोड़ रुपये का अनुदान (सब्सिडी) दिया जाएगा। यह सब्सिडी निवेशकों को प्रोत्साहन देने और उनकी लागत कम करने में मदद करेगी।
अब तक इस नीति के तहत कुल 10 बैठकों में 331 प्रस्तावों को मंजूरी मिल चुकी है। इन प्रस्तावों में कई तरह के प्रोजेक्ट शामिल हैं, जैसे:
रेडी टू ईट (62 प्रोजेक्ट)
सोलर पावर (58 प्रोजेक्ट)
फ्रोजेन फूड (31 प्रोजेक्ट)
दुग्ध प्रसंस्करण (14 प्रोजेक्ट)
फल और सब्जी प्रसंस्करण (21 प्रोजेक्ट)
मसाला प्रसंस्करण (11 प्रोजेक्ट)
मल्टीग्रेन आटा (8 प्रोजेक्ट)
इस लिस्ट को देखकर लगता है कि सरकार हर सेक्टर को बढ़ावा देना चाहती है।
बुन्देलखण्ड में भी दिख रहा है बदलाव!
यूपी के बुन्देलखण्ड जैसे क्षेत्र में भी खाद्य प्रसंस्करण का विस्तार हो रहा है। यह इलाका मटर उत्पादन के लिए जाना जाता है और अब यहां के उद्यमी भी फ्रोजेन फूड और वेजिटेबल प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने में रुचि दिखा रहे हैं। जालौन जैसे जिलों में ऐसे कई नए प्रोजेक्ट आ रहे हैं। इससे बुन्देलखण्ड की अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार मिलेगी।
इसके अलावा, बुलन्दशहर के एक उद्यमी राहुल अग्रवाल अफ्रीका के देश बेनिन से समन्वय करके करीब 9 करोड़ रुपये का काजू प्रसंस्करण प्लांट लगा रहे हैं। इससे पता चलता है कि यूपी के उद्यमी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोच रहे हैं।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ, बढ़ेगी आय
सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा फायदा किसानों को होगा। जब बड़ी-बड़ी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां लगेंगी, तो उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। वे सीधे इन यूनिटों को अपनी फसल बेच पाएंगे, जिससे उन्हें अच्छा दाम मिलेगा। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और गांवों में भी आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
सरकार ने निवेशकों से यह भी कहा है कि वे अपने यूनिट के आसपास के गांवों के किसानों से समन्वय करें। उन्हें फल और सब्जी उगाने के लिए प्रोत्साहित करें और उनसे फसल खरीदने के लिए कॉन्ट्रैक्ट करें। इससे किसानों को पहले से ही पता होगा कि उनकी फसल कहां बिकेगी।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का विजन
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को इस नीति के तहत मिले प्रस्तावों पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि हमारा लक्ष्य यूपी में अधिक से अधिक पूंजी निवेश कराना है, ताकि हम राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकें। उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना पर भी विशेष ध्यान देने को कहा है।