कमल याज्ञवल्क्य | रायसेन, मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश के रायसेन जिले का एक छोटा-सा गांव जामगढ़-भगदेई, आजकल एक बार फिर चर्चा में है। वजह है वहां मौजूद रहस्यमयी शिव मंदिर और गुफा, जो न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि इतिहास और रहस्य से भी भरा हुआ है। यहां के मंदिर और गुफाएं ऐसी हैं, जो आपको चौंकाएंगी भी और भक्ति में डुबो भी देंगी।
जहां शिवजी का जलाभिषेक करता है पहाड़
जामगढ़ गांव के पास विंध्याचल पर्वत की तलहटी में स्थित एक प्राचीन शिव गुफा है, जहां खुद पहाड़ से बहती जलधारा शिवलिंग पर गिरती है। मान्यता है कि यह प्राकृतिक जलधारा खुद विंध्याचल पर्वत की ओर से शिवजी का जलाभिषेक करती है। सालभर यहां पानी की बूंदें शिवलिंग पर टपकती रहती हैं, जिसे भक्त शिव का चमत्कार मानते हैं।
और सूर्य करते हैं शिवजी का श्रृंगार!
जामगढ़ के नजदीक ही भगदेई गांव में एक प्राचीन शिव मंदिर है, जहां एक और चमत्कारी दृश्य देखने को मिलता है। सुबह की पहली किरण सीधे मंदिर में शिवलिंग पर पड़ती है, मानो सूर्य खुद शिवजी का श्रृंगार कर रहे हों। यह दृश्य न केवल भक्ति से जुड़ा है, बल्कि इसे देखने हजारों श्रद्धालु हर साल शिवरात्रि और सावन के सोमवारों को यहाँ आते हैं।
जामवंत जी ने बनाया था मंदिर, वो भी एक ही रात में!
यह मंदिर इतना खास क्यों है? इसके पीछे एक रोचक और रहस्यमयी कथा है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह मंदिर कोई साधारण इंसान नहीं, बल्कि रामायण काल के प्रसिद्ध रीछराज जामवंत जी ने बनाया था — वो भी सिर्फ एक ही रात में!
कहानी के मुताबिक, जामवंत जी निर्वस्त्र होकर रात के अंधेरे में मंदिर निर्माण में जुटे थे। उन्होंने अपनी बहन से कहा था कि यदि कोई आता दिखे तो संकेत दे देना। लेकिन बहन को यह सब अजीब लगा और उसने उत्सुकता में चक्की चला दी। चक्की की आवाज सुनते ही जामवंत जी समझ गए कि कोई आ गया है और वे तुरंत निर्माण अधूरा छोड़ गुफा की ओर चले गए। आज भी इस मंदिर का कलश अधूरा है, जो इस कथा की पुष्टि करता है।
आज भी दिखते हैं जामवंत जी के पैरों के निशान
गांव में एक बरसाती झरने के पास चट्टानों पर आज भी ऐसे निशान मौजूद हैं, जिन्हें लोग जामवंत जी के पैरों के निशान मानते हैं। ऐसा लगता है जैसे किसी ने गीली मिट्टी पर दौड़ लगाई हो और वो पल चट्टानों पर जम गया हो।
एक श्लोक, जो आज तक कोई नहीं पढ़ पाया
पैरों के निशानों के पास ही एक अनपढ़ा श्लोक भी उकेरा गया है। दिखता तो साफ है, पर आज तक कोई विद्वान या भाषा-विशेषज्ञ उसे पढ़ नहीं पाया। लोगों का मानना है कि इसमें मंदिर निर्माण या जामवंत जी की कथा से जुड़ा कोई गूढ़ रहस्य छिपा हो सकता है।
पुराना महल और खोते हुए सबूत
इन सबके पास ही कभी एक पुराना महल भी हुआ करता था। अब वहां सिर्फ पत्थरों के कुछ टुकड़े बचे हैं। गांव वालों का कहना है कि अवैध खुदाई के चलते कई प्राचीन मूर्तियाँ और शिल्प भी नष्ट हो गए हैं। यदि इस क्षेत्र की वैज्ञानिक खुदाई हो, तो यहां के इतिहास से जुड़ी कई और परतें खुल सकती हैं।
लोगों की मांग: संरक्षण और पुरातात्विक जांच
आज जामगढ़-भगदेई के लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि इस प्राचीन धरोहर को संरक्षित किया जाए, इसकी पुरातात्विक जांच कराई जाए, ताकि मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता दुनिया के सामने आ सके। गांववाले मानते हैं कि यह मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति की भी जीती-जागती मिसाल है।