Sanatan Hindu Ekta Padyatra हिंदू एकता का ऐतिहासिक क्षण: बागेश्वर धाम सरकार की अगुवाई में लाखों सनातनी हुए पदयात्रा में शामिल padyatra Delhi to Vrindavan
Sanatan Hindu Ekta Padyatra बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में दिल्ली से वृंदावन तक निकाली जा रही सनातन हिंदू एकता पदयात्रा। लाखों सनातनियों की उपस्थिति, संतों के आशीर्वाद और समरसता का संदेश देते हुए यात्रा ने भारत को जगतगुरु बनाने का संकल्प लिया।
दिल्ली– ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra ) दिल्ली की पवित्र धरती पर 7 नवंबर का दिन इतिहास के सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ का शुभारंभ हुआ। इस यात्रा ने न केवल आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया बल्कि पूरे देश को सनातन एकता का संदेश दिया।
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दिल्ली के छतरपुर मंदिर सिद्धपीठ कात्यायनी माता मंदिर परिसर से यात्रा का आरंभ हुआ, जहां देशभर से आए संत-महात्मा, साधु-संत और हजारों की संख्या में सनातनी श्रद्धालु एक साथ मौजूद रहे। आरंभ से पहले भव्य मंचीय कार्यक्रम हुआ जिसमें भारत माता, गंगा-यमुना जी और आदि गुरु शंकराचार्य की आरती कर यात्रा को शुभारंभ किया गया। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
संतों का आशीर्वाद और बागेश्वर सरकार का आह्वान
दीदी मां ऋतंभरा, जैन संत लोकेश मुनि, दाती महाराज, अभय दास महाराज, जगतगुरु भैया दास महाराज समेत देश के अनेक विद्वान संतों ने इस ऐतिहासिक पदयात्रा को आशीर्वाद दिया। संत समाज ने एक स्वर में कहा कि यह यात्रा राजनीतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अभियान है — जो धर्म और समरसता का नया युग लिखेगी। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
मंच से उद्बोधन देते हुए बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा—
“यह दिन इतिहास में दर्ज रहेगा। धर्म सम्राट करपात्री जी महाराज ने जिस गौ आंदोलन की शुरुआत की थी, अब उसे आगे बढ़ाने का समय आ गया है। आज का मंत्र है — संतों का साथ, सनातनियों का हाथ, नवंबर सात — लक्ष्य के लिए निकल पड़ो!” ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
उन्होंने कहा कि यह यात्रा हिंदू समाज की ताकत और एकजुटता का प्रतीक है। “हम परिवार की नहीं, विचारों की लड़ाई लड़ने निकले हैं। हिंदू केवल एक धर्म नहीं, बल्कि विचारधारा है, जो मानवता का मूल है,” शास्त्री जी ने कहा। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
‘कुचक्रों को कुचलने का समय आ गया है’ – दीदी मां ऋतंभरा
वृंदावन की दीदी मां साध्वी ऋतंभरा ने अपने भावनात्मक उद्बोधन में कहा—
“जहां सद्भावना होती है, वहीं संपत्ति और सफलता आती है। जब भी भारत संकट में होता है, तब वह बागेश्वर सरकार जैसे सपूत को जन्म देता है। अब कुचक्रों को कुचलने और धर्म की रक्षा करने का समय आ गया है।” ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
उन्होंने कहा कि यह यात्रा विधर्मियों को जवाब देगी और यह दिखाएगी कि भारत माता के बेटे जाग चुके हैं। “यह आंदोलन केवल धर्म रक्षा नहीं, बल्कि समरस भारत की ओर कदम है,” दीदी मां ने जोड़ा। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
गीता मनीषी महाराज बोले – यह यात्रा भारत माता के कंठ का श्रृंगार बनेगी
प्रख्यात संत गीता मनीषी जी महाराज ने कहा कि यह पदयात्रा केवल बागेश्वर बालाजी और बांके बिहारी जी के मिलन का प्रतीक नहीं, बल्कि उन लोगों के मिलन की भी पहल है जो समाज में वंचित या उपेक्षित महसूस करते हैं। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
“यह यात्रा समरसता की माला पिरोने का काम करेगी और भारत को फिर से जगतगुरु बनाने का आधार बनेगी,” उन्होंने कहा।
राष्ट्रगान, वंदे मातरम और सात संकल्पों के साथ बढ़े कदम
पदयात्रा की शुरुआत राष्ट्रगान और वंदे मातरम के साथ हुई। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने एक साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra ) मां कात्यायनी और बालाजी को साक्षी मानकर सात संकल्प दोहराए गए — ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra ) सनातन धर्म की रक्षा, एकता, सेवा, समरसता, गौसंरक्षण, भारत माता की आराधना और हिंदू राष्ट्र की स्थापना।
महाराज श्री ने कहा—
“हर सनातनी को अपने धर्म की आन, बान और शान के लिए सदैव खड़ा रहना होगा।”
दिल्ली की सड़कों पर उमड़ा आस्था का जनसागर
पदयात्रा के आरंभ के साथ ही दिल्ली की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोग घरों से निकलकर, छतों से झांकते हुए, और फूल बरसाते हुए सनातन एकता के इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बने। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra ) करीब पांच लाख श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हुए — बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी एक ही भाव से “जय श्री राम” और “सनातन एकता जिंदाबाद” के नारे लगा रहे थे।
दिल्ली से शुरू हुई यह यात्रा वृंदावन तक 150 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। पहले दिन यात्रा ने 11 किलोमीटर का सफर तय किया, जिसमें 5 किलोमीटर लंबी कतार में केवल जनसागर ही दिखाई दिया। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
महिलाएं भी पीछे नहीं: नारी शक्ति ने दिखाया उत्साह
इस यात्रा में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां भी शामिल हुईं। आयोजकों के अनुसार, अब तक 50 हजार से अधिक लोगों ने पंजीयन कराया, जबकि एक लाख से ज्यादा सनातनी बिना पंजीयन भी यात्रा में जुड़े। महिलाओं के उत्साह और आस्था ने इस यात्रा को और भी भव्य बना दिया। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
200 से अधिक स्थानों में हुई पुष्प वर्षा, जगह-जगह जलपान की व्यवस्था पदयात्रा का 200 से अधिक स्थानों में पुष्प वर्षा के साथ स्वागत हुआ। जिस क्षेत्र से पदयात्रा निकल रही थी उस क्षेत्र के लोग घरों से बाहर निकल आए। दरवाजे, छतों एवम ऊंचे स्थानों में खड़े होकर लोग पदयात्रा का अभिवादन कर रहे थे। लोगों ने पुष्प वर्षा कर सनातनियों का उत्साह बढ़ाया। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
पदयात्रा का पहला चरण: जीरखोद मंदिर में रात्रि विश्राम
पहले दिन की यात्रा का समापन जीरखोद मंदिर, दिल्ली में हुआ, जहां रात्रि विश्राम का आयोजन । अगले दिन यात्रा बायोटेक कॉलेज के पास भोजन भजन और विश्राम के बाद आगे बढ़ेगी। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
8 नवंबर को यात्रा फरीदाबाद के दशहरा मैदान में रात्रि विश्राम करेगी, इसके बाद आगे वृंदावन की ओर प्रस्थान करेगी।
जनता का उत्साह: बागेश्वर धाम सरकार की सादगी ने जीता दिल
बागेश्वर धाम सरकार की सादगी और सहजता ने सभी को प्रभावित किया। लोगों ने कहा —
“जो विरोधी कहते हैं कि सरकार केवल वीआईपी लोगों से मिलते हैं, वे इस पदयात्रा में आकर देखें कि हमारे महाराज कितने सरल और जनप्रिय हैं।” ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
गरीब, असहाय और निर्धन हर वर्ग के लोग उनके दर्शन के लिए उमड़े थे। उनका एक ही उद्देश्य था — पूज्य सरकार के नेतृत्व में ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ को सफल बनाना। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
अंतिम लक्ष्य – एकजुट भारत, सनातन राष्ट्र
इस ऐतिहासिक पदयात्रा का लक्ष्य केवल दिल्ली से वृंदावन तक की दूरी तय करना नहीं, बल्कि भारत के हर कोने में सनातन एकता का संदेश पहुंचाना है। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
महाराज श्री ने कहा—
“जब तक हर गांव और हर हृदय में सनातन की ज्योति नहीं जलती, तब तक यह यात्रा अधूरी है।”
पदयात्रा ने यह साबित कर दिया कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि यह समाज को जोड़ने की शक्ति है। हजारों लोगों की भीड़, संतों की वाणी और भगवा ध्वजों की लहराती कतार — यह सब मिलकर एक ही संदेश दे रहे थे — “भारत सनातन है, सनातन रहेगा।” ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )
‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना का प्रतीक बन चुकी है। दिल्ली से वृंदावन तक बागेश्वर धाम सरकार के नेतृत्व में चल रही यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नया अध्याय लिखेगी — एक ऐसा भारत, जो एकता, समरसता और धर्मनिष्ठा पर टिका होगा। ( Sanatan Hindu Ekta Padyatra )