मथुरा जिले में इस बार पराली जलाने वाले किसानों को किसी भी SupremeCourtOrder हालत में बख्शा नहीं जाएगा। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने साफ कहा है कि उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों के मुताबिक, खेतों में फसल अवशेष जलाना अब अपराध माना गया है। ऐसे में अगर कोई किसान पराली जलाते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
कितना जुर्माना लगेगा?
डीएम ने बताया कि पराली जलाने पर किसानों को भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा। इसमें जमीन के क्षेत्रफल के हिसाब से जुर्माना तय किया गया है – SupremeCourtOrder
- 2 एकड़ से कम खेत पर पराली जलाने पर ₹5,000 जुर्माना।
- 2 से 5 एकड़ के बीच खेत पर जलाने पर ₹10,000 जुर्माना।
- 5 एकड़ से अधिक खेत पर जलाने पर ₹30,000 प्रति घटना का जुर्माना।
इसका मतलब साफ है कि कोई भी किसान यह सोचकर पराली न जलाए कि उसे आसानी से छोड़ा जाएगा।
हार्वेस्टर बिना सिस्टम के होगा सीज
जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर कोई कम्बाइन हार्वेस्टर बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (SMS), स्ट्रा रैक या बेलर मशीन के खेतों में चलता पाया गया तो उसे तुरंत सीज कर लिया जाएगा। हार्वेस्टर मालिक को अपने खर्चे पर SMS लगवाना होगा, तभी मशीन छोड़ी जाएगी। SupremeCourtOrder
जेल भी हो सकती है सजा
अगर कोई किसान बार-बार चेतावनी के बावजूद पराली जलाते पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ जुर्माने के साथ-साथ करावास की कार्रवाई भी की जा सकती है। यानी जेल जाने का भी खतरा रहेगा। SupremeCourtOrder
उपग्रह से होगी निगरानी
कई किसान यह सोचकर रात 2-3 बजे पराली जला देते हैं कि किसी को पता नहीं चलेगा। लेकिन डीएम ने साफ किया कि अब यह संभव नहीं है। क्योंकि सैटेलाइट सिस्टम से 24 घंटे रीयल टाइम निगरानी होती है। पराली जलाने की हर घटना की लोकेशन और फोटो सीधे जिला प्रशासन तक पहुंच जाती है। ऐसे में किसी भी घटना को छुपाना नामुमकिन है। SupremeCourtOrder
किसानों से अपील
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने किसानों से अपील की कि वे खेतों में फसल अवशेष न जलाएं। पराली खेतों की मिट्टी के लिए नुकसानदायक नहीं, बल्कि फायदेमंद हो सकती है। किसान चाहें तो इन अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर जैविक खाद (Organic Manure) बना सकते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और अगली फसल बेहतर होगी। SupremeCourtOrder
क्यों जरूरी है ये कदम?
पराली जलाने से न सिर्फ हवा प्रदूषित होती है, बल्कि मिट्टी की ऊपरी परत भी खराब हो जाती है। इसका सीधा असर किसानों की पैदावार पर पड़ता है। वहीं धुआं बढ़ने से सांस की बीमारियां, आंखों में जलन और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत में हर साल पराली जलने से प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो जाता है।
प्रशासन की सख्ती
मथुरा प्रशासन ने साफ किया है कि इस बार पराली जलाने की एक भी घटना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उपग्रह से मिली सूचना के आधार पर हर घटना पर तुरंत कार्रवाई होगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करें और पराली को खेतों में जलाने के बजाय उसका सही उपयोग करें। SupremeCourtOrder
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