सुमित शर्मा United Nations Conference in Vietnam वियतनाम के हनोई शहर में 3 से 5 अक्टूबर 2025 तक आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में भारत की तरफ से एक बार फिर झारखंड के गौरव डॉ. रणधीर कुमार ने देश का प्रतिनिधित्व किया।
डॉ. रणधीर नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCB) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और वे लंबे समय से शिक्षा, मानवाधिकार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में कार्यरत हैं।
Table of Contents
यह प्रतिष्ठित सम्मेलन यूनाइटेड नेशन्स हाई कमिश्नर ऑफ रिफ्यूजी, ऑस्ट्रेलियन एंबेसी, आयरलैंड एंबेसी और वियतनाम सरकार के तत्वाधान में आयोजित किया गया था।
इस वैश्विक आयोजन में लगभग 60 देशों के 150 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिसमें कई देशों के राजदूत और काउन्सलर भी मौजूद रहे। United Nations Conference in Vietnam
शिक्षा, संस्कृति और मानवाधिकार पर केंद्रित रहा सम्मेलन
इस सम्मेलन में यूनिसेफ, यूनिस्को, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO), यूनाइटेड नेशन वीमेन, यूनाइटेड पॉपुलेशन फंड और वर्ल्ड फूड प्रोग्राम जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
भारत की ओर से डॉ. रणधीर कुमार ने यूनाइटेड नेशंस एजुकेशन, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (UNESCO) परिषद में देश का प्रतिनिधित्व किया। United Nations Conference in Vietnam
यूनेस्को परिषद में भारत समेत कुल 23 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस मंच पर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में शिक्षा सुधार, डिजिटल एजुकेशन, पारंपरिक शिक्षा प्रणाली और शिक्षा में तकनीकी योगदान जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
डॉ. रणधीर ने रखा भारत का विजन – “शिक्षा ही असली सशक्तिकरण”
भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉ. रणधीर कुमार ने “भारतीय ज्ञान प्रणाली, शिक्षा में डिजिटल क्रांति और संस्कृति के संरक्षण” पर अपना विस्तृत शोध पत्र प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा को नए आयाम दिए हैं और यह नीति ग्रामीण बच्चों को भी डिजिटल शिक्षा से जोड़ने का प्रयास कर रही है। United Nations Conference in Vietnam
उन्होंने यूनेस्को से आग्रह किया कि विश्वभर में मानवाधिकारों की शिक्षा को माध्यमिक शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि भावी पीढ़ी न्याय और समानता के मूल्यों को समझ सके। United Nations Conference in Vietnam
भारतीय विरासत और संस्कृति के संरक्षण की अपील
डॉ. रणधीर ने अपने संबोधन में भारत की आदिवासी विरासत, संस्कृति, कला, और प्राचीन शिक्षा पद्धति को यूनेस्को के वैश्विक मंच पर शामिल करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारत के कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक – जैसे अशोक, मगध, मौर्य व शिवाजी महाराज – आज की युवा पीढ़ी से दूर होते जा रहे हैं।
उन्होंने यूनेस्को से इन विरासतों को पुनर्जीवित करने और उन्हें विश्व सांस्कृतिक धरोहर के रूप में पहचान दिलाने का अनुरोध किया।
https://twitter.com/DainikHistory?t=un2EfdiIG8L5BD8EkPp2qg&s=08
शिक्षा और मानवाधिकार के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान
डॉ. रणधीर कुमार झारखंड के गिरिडीह जिले के नईटांड़ गांव के निवासी हैं। वे पूर्व प्रधानाध्यापक श्री दिनेश्वर वर्मा के पौत्र और शिक्षक श्री दीनदयाल प्रसाद के पुत्र हैं।
अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी धारक डॉ. रणधीर ने झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय, IIM रांची, और लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। United Nations Conference in Vietnam
बहुत कम उम्र में उन्होंने शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।
उन्हें यंग इंडिया फेलोशिप, झारखंड नागरिक सम्मान (2016), राष्ट्रीय शिक्षा सम्मान (2017), मानद डॉक्टरेट (2018), झारखंड रत्न (2019) और झारखंड श्री सम्मान जैसे कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
लेखन, नेतृत्व और प्रेरणा का प्रतीक
डॉ. रणधीर अब तक 8 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं और कई पत्रिकाओं व समाचार पत्रों का संपादन भी किया है।
उन्होंने 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंसों में हिस्सा लेकर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं।
शिक्षा, युवा नेतृत्व और मानवाधिकार जैसे विषयों पर उन्होंने कई सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन किया है।
वे नमन इंटरनेशनल फाउंडेशन और NHRCB जैसी संस्थाओं के संस्थापक हैं और देशभर में सामाजिक सुधार के लिए कार्यरत हैं।
कई विश्वविद्यालयों और आयोगों में उन्हें बतौर गेस्ट फैकल्टी और वक्ता आमंत्रित किया जाता है। United Nations Conference in Vietnam
मानवाधिकार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य
वर्तमान में बतौर चेयरमैन, नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, डॉ. रणधीर कुमार देशभर में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय हैं।
उनके नेतृत्व में संस्था के हजारों सदस्य समाज के निचले तबके में जाकर शोषित, वंचित और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा में जुटे हैं। United Nations Conference in Vietnam
डॉ. रणधीर कुमार का वियतनाम सम्मेलन में प्रतिनिधित्व केवल भारत की शिक्षा या संस्कृति की बात नहीं थी, बल्कि यह भारत की मानवतावादी सोच और सर्वजन हिताय दृष्टिकोण का प्रतीक था।
उन्होंने साबित किया कि यदि संकल्प और समर्पण हो, तो एक व्यक्ति भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की आवाज़ बन सकता है।