Korba, Chhattisgarh. खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही किसानों की उम्मीदें भी खेतों में लहराने लगी हैं। कोरबा जिले के दूरस्थ गांव रवागांव के युवा किसान बृजपाल पोर्ते भी इन्हीं उम्मीदों को लेकर दिन-रात खेतों में जुटे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका मेहनत और भरोसे से भरा जज़्बा यह दिखाता है कि किस तरह एक साधारण किसान भी बेहतर फसल की उम्मीद में तकनीक और मेहनत का संतुलन बनाकर काम कर सकता है।
रवागांव, जटगा पंचायत का आश्रित ग्राम है और यहां खेती करना आसान नहीं है। लेकिन बृजपाल पोर्ते जैसे किसान अपनी पत्नी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेती को जीने का जरिया बनाए हुए हैं। इस साल खरीफ की शुरुआत होते ही दोनों ने अपने खेतों की तैयारी शुरू कर दी।
समय पर मिला खाद-बीज, नहीं करनी पड़ी भागदौड़
बृजपाल बताते हैं कि इस बार सहकारी समिति जटगा से उन्हें समय पर उन्नत किस्म के बीज और जरूरी उर्वरक – जैसे डीएपी और यूरिया – मिल गए। उनका कहना है कि “ना तो बार-बार समिति के चक्कर लगाने पड़े, और ना ही खाद-बीज की कोई कमी महसूस हुई। इस बार सब कुछ समय पर मिल गया, जिससे खेती की शुरुआत भी समय पर हो पाई।”
ये सुविधा सिर्फ बृजपाल के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी राहत भरी रही। समिति ने पर्याप्त मात्रा में कृषि सामग्री उपलब्ध कराकर यह सुनिश्चित किया कि किसानों को परेशानी ना हो।
फसल की बढ़वार के लिए किया उर्वरक का छिड़काव
फिलहाल बृजपाल और उनकी पत्नी धान की फसल की देखभाल में व्यस्त हैं। आज उन्होंने खेतों में डीएपी और यूरिया का छिड़काव किया, जिससे फसल की बढ़वार अच्छी हो और उपज में इज़ाफा हो। उनका मानना है कि उन्नत किस्म के खाद और बीज के साथ यदि समय पर मेहनत की जाए, तो खेती घाटे का सौदा नहीं होती।
बृजपाल ने बताया कि इस साल बारिश भी समय पर हुई है, जिससे फसल की स्थिति ठीकठाक बनी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार की मेहनत उन्हें अच्छा परिणाम देगी और उनकी फसल परिवार की जरूरतों को पूरा कर सकेगी।
खेती ही जीवन का आधार, मेहनत ही ताकत
बृजपाल पोर्ते जैसे किसानों की कहानी गांवों की असली तस्वीर बयां करती है। जब तकनीक, सरकारी सुविधाएं और किसान की मेहनत एक साथ आती हैं, तो खेती फायदे का सौदा बन जाती है। बृजपाल कहते हैं, “खेती ही हमारा जीवन है। जो भी पास है, उसी में मेहनत करके आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। उम्मीद है कि भगवान भी मेहनत का फल ज़रूर देगा।”
वे यह भी मानते हैं कि अगर सहकारी समितियों से इस तरह समय पर मदद मिलती रही तो छोटे किसानों के लिए खेती और आसान हो जाएगी।
छोटे किसानों के लिए प्रेरणा है बृजपाल की कहानी
रवागांव जैसे गांवों में जहां संसाधन सीमित होते हैं, वहां बृजपाल पोर्ते जैसे युवा किसान न सिर्फ अपने परिवार का पेट भरते हैं, बल्कि दूसरों को भी प्रेरणा देते हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि यदि इच्छाशक्ति हो और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिले, तो सीमित ज़मीन में भी आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है।
उनकी मेहनत से साफ झलकता है कि आने वाले दिनों में यदि इसी तरह सहयोग और सुविधाएं मिलती रहीं, तो गांवों की खेती को मजबूती मिल सकती है और किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं।