लखनऊ। विकासखंड बीकेटी क्षेत्र की कई स्थाई गौशालाओं में व्यवस्थाओं की पोल उस समय खुल गई जब संयुक्त निदेशक, प्रक्षेत्र एवं पशुधन विकास डॉ. सुनील कुमार राय ने औचक निरीक्षण किया। उन्होंने कठवारा, नगुवामऊ और नगर पंचायत बीकेटी के अकोहरी गांव में संचालित गौशालाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान गौशालाओं की हालत देखकर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई।
निरीक्षण के दौरान डॉ. सुनील कुमार राय के साथ डिप्टी सीवीओ डॉ. अजय यादव, पशुधन प्रसार अधिकारी करुणेश उपाध्याय और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने सबसे पहले गौशालाओं में मौजूद गौवंशों की संख्या, उनकी सेहत, टीकाकरण की स्थिति, चारा-पानी की उपलब्धता और सफाई व्यवस्था का ध्यानपूर्वक जायजा लिया।
हरा चारा गायब, सफाई बदहाल और टीकाकरण अधूरा
निरीक्षण के दौरान डॉ. राय ने पाया कि कई जगहों पर हरे चारे की कमी है, जिसे लेकर संचालक सिर्फ दावा कर रहे हैं लेकिन हकीकत में हरा चारा मौजूद नहीं था। गौशालाओं में छह केयरटेकर होने के बावजूद साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं थी। डॉ. राय ने कहा कि यह घोर लापरवाही है और इसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए।
टीकाकरण के मामले में भी कई गौवंशों का टीका अब तक नहीं लगा था। इस पर उन्होंने डिप्टी सीवीओ और पशुधन अधिकारी को निर्देश दिया कि टीकाकरण का काम प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा कराया जाए।
चरही टूटी, जलनिकासी की व्यवस्था फेल
ग्राम पंचायत नगुवामऊ में स्थाई गौशाला की हालत और भी खराब निकली। निरीक्षण के समय न तो पशु पंचनामा रजिस्टर मौजूद था और न ही गोवंशों को चारा देने के लिए बनी चरही सही हालत में थी। चरही कई जगहों से टूटी हुई थी और उसमें से लोहे की सरिए बाहर निकली हुई थीं, जो जानवरों के लिए खतरा बन सकती हैं। डॉ. राय ने इस पर तुरंत मरम्मत कराने के निर्देश दिए।
गौशाला संचालक दिलीप सिंह ने बताया कि बरसात में जलनिकासी न होने के कारण कीचड़ भर जाता है, जिसमें अक्सर वृद्ध गोवंश फंस जाते हैं। इस पर संयुक्त निदेशक ने नगर पंचायत और संबंधित विभाग को निर्देशित किया कि जलनिकासी की समस्या का तत्काल समाधान किया जाए।
बीमार गौवंश और चिकित्सा सुविधाओं की कमी
निरीक्षण के दौरान एक बीमार गौवंश भी मिला, जिसके इलाज की जानकारी दी गई। डॉ. राय ने निर्देश दिए कि किसी भी बीमार जानवर की तुरंत जानकारी संबंधित पशु चिकित्सा केंद्र को दी जाए और समय पर इलाज सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि गौशालाओं में छाया और स्वच्छ पानी की व्यवस्था हर समय बनी रहनी चाहिए, ताकि बारिश या तेज धूप में भी गौवंशों को किसी तरह की परेशानी न हो।
कर्मचारियों की बात सुनी, जल्द समाधान का आश्वासन
निरीक्षण के दौरान डॉ. राय ने गौशालाओं में कार्यरत कर्मचारियों से भी बातचीत की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों की आवश्यकताओं और सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
गौशालाओं की नियमित निगरानी के निर्देश
संयुक्त निदेशक ने कहा कि गौशालाएं सिर्फ गौवंश संरक्षण के लिए ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्वच्छता, रोजगार और विकास से भी जुड़ी हुई हैं। इसलिए इनकी व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त रहनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराई जाए और गौशालाओं की नियमित निगरानी की जाए।