ग्वालियर। मध्यप्रदेश के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीक अपनाकर उद्यानिकी फसलों की ओर बढ़ने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि किसान केवल गेहूं, धान या सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों तक सीमित न रहें, बल्कि बागवानी, जैविक खेती और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में कदम बढ़ाएं।
मंत्री कुशवाह ग्वालियर में एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ करने पहुंचे थे। इस मौके पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति श्री अरविंद कुमार शुक्ला, कृषि वैज्ञानिक और जिले के कई प्रगतिशील किसान भी मौजूद रहे।
बगिया लगाइए, सरकार से पाइए 3 लाख तक का अनुदान
मंत्री ने कार्यशाला में मौजूद किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि राज्य सरकार एक नई योजना लेकर आ रही है, जिसके तहत यदि कोई किसान अपनी माँ के नाम एक बगिया लगाता है, तो उसे 3 लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों की आमदनी बढ़ाने और मातृ सम्मान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लाई जा रही है।
गांवों में खुलें छोटे-छोटे उद्योग
श्री कुशवाह ने कहा कि गांवों में ज्यादा से ज्यादा फूड प्रोसेसिंग यूनिट और कृषि आधारित लघु उद्योग खोले जाने चाहिए ताकि किसान अपनी उपज का मूल्य स्वयं तय कर सकें और बिचौलियों पर निर्भर न रहें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों की मेहनत का ही नतीजा है कि आज मध्यप्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश में पहले नंबर पर है।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले सिंचाई की समस्याएं थीं, लेकिन नदी जोड़ो अभियान और नए डेम बनने के कारण अब सिंचाई का रकबा काफी बढ़ गया है, जिससे उत्पादन में भी इज़ाफा हुआ है।
जैविक खेती को बढ़ावा देने की ज़रूरत
मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि किसानों को जैविक खेती की ओर रुख करना चाहिए और अपनी फसलों में कम से कम कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को केवल आईएसआई मार्क वाली मशीनें और उपकरण ही उपलब्ध कराए जाएं।
इसके साथ ही किसानों से आह्वान किया कि वे योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और समय रहते पंजीयन कराएं। सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि किसानों को उत्तम गुणवत्ता के बीज और तकनीकी जानकारी समय पर मिले।
कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति ने दी तकनीकी सलाह
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलपति अरविंद कुमार शुक्ला ने भी किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में किसानों को नई तकनीकों को अपनाने की ज़रूरत है। अगर किसान परंपरागत खेती के साथ-साथ उद्यानिकी और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में भी काम करें, तो उनकी आय में दुगना तक इज़ाफा हो सकता है।
उन्होंने बताया कि कृषि के क्षेत्र में कई नए अनुसंधान और नवाचार हो रहे हैं, जिनकी जानकारी किसानों को मिलनी चाहिए और उसका बेहतर उपयोग करना चाहिए।
कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी जानकारी साझा की गई। किसानों को बताया गया कि किस तरह से वे कम लागत में अधिक उत्पादन कर सकते हैं और अपने उत्पादों को बाजार में बेहतर दामों पर बेच सकते हैं।