सीतापुर (छत्तीसगढ़)।
भक्ति, आस्था और सेवा के भाव को समर्पित कांवड़ यात्रा का एक अनोखा उदाहरण पेश करते हुए सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने इस साल भी 425 किलोमीटर लंबी पदयात्रा की शुरुआत कर दी है। उन्होंने वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट से गंगा जल उठाकर मैनपाट के चुरकी पानी शिव मंदिर तक जलाभिषेक के उद्देश्य से 12 दिवसीय पैदल यात्रा आरंभ की है।
इस यात्रा में उनके साथ सीतापुर विधानसभा क्षेत्र से आए करीब 100 कांवड़िए भी शामिल हैं। खास बात यह है कि यह कांवड़ यात्रा पिछले 4 वर्षों से लगातार की जा रही है, जिसकी अगुवाई खुद विधायक टोप्पो करते हैं।
हर दिन की यात्रा: 35 से 45 किलोमीटर
इस पदयात्रा में, कांवड़िए हर रोज़ सुबह जल्दी निकलते हैं और शाम तक करीब 35 से 45 किलोमीटर पैदल चलते हैं। रास्ते में वे थोड़ा-बहुत आराम ज़रूर करते हैं, लेकिन अपनी मंज़िल की तरफ लगातार बढ़ते रहते हैं। हर दिन का सफ़र पूरा करने के बाद, रात में जहाँ पड़ाव होता है, वहीं वे विश्राम करते हैं। अगले दिन फिर उसी जोश और भक्ति के साथ यात्रा शुरू होती है। यह सिलसिला 12 दिन तक चलता है, जब तक वे मैनपाट के चुरकी पानी शिव मंदिर पहुँचकर गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक नहीं कर लेते।
यात्रा में भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
इस बार की यात्रा में एक और खास पहल जोड़ी गई है। विधायक रामकुमार टोप्पो हर पड़ाव पर पौधरोपण भी कर रहे हैं। वे अपने साथ पौधे लेकर चल रहे हैं और जहां-जहां रुकते हैं, वहां “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधे रोप रहे हैं। इससे भक्ति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है।
लगातार बढ़ रही है श्रद्धालुओं की संख्या
जब हमने यात्रा के उद्देश्य और विस्तार पर जानकारी ली तो विधायक रामकुमार टोप्पो ने बताया कि,”यह यात्रा सीतापुर क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि के लिए की जाती है। जब हमने पहली बार यात्रा की थी, तब 60 श्रद्धालु शामिल हुए थे, लेकिन इस बार यह संख्या बढ़कर 120 तक पहुंच चुकी है। हर साल लोगों की आस्था बढ़ रही है और कांवड़ियों की संख्या में भी इज़ाफा हो रहा है।”
सभी के साथ भोजन और विश्राम
विधायक टोप्पो इस यात्रा में कांवड़ियों के साथ ही भोजन करते हैं और उनके साथ ही जमीन पर विश्राम करते हैं। इससे सभी के बीच एकता और सेवा भाव की भावना और भी गहरी होती है।
क्षेत्र में बढ़ रही है भक्ति की चेतना
इस यात्रा के चलते सीतापुर क्षेत्र में भक्ति का वातावरण बना हुआ है। लोगों में शिव भक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और युवा भी इस पवित्र कार्य में शामिल हो रहे हैं। खास बात यह है कि यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण बचाव का अभियान भी बन चुका है।