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रायपुर: सावन के दूसरे सोमवार को कृषि मंत्री रामविचार नेताम पहुंचे तपेश्वर धाम, शिवभक्तों को परोसा प्रसाद!

छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सावन के दूसरे सोमवार को बलरामपुर के तपेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की. उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख-शांति की कामना की और शिवभक्तों के लिए भंडारे का आयोजन कर प्रसाद वितरित किया. जानें स्थानीय कलाकारों के लिए उनके विचार और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत पर उनका बयान.

On: July 21, 2025 9:59 PM
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रायपुर, छत्तीसगढ़: सावन का दूसरा सोमवार था और चारों ओर भगवान शिव की भक्ति में डूबे भक्त नज़र आ रहे थे. इसी पावन मौके पर छत्तीसगढ़ के कृषि एवं आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम भी बलरामपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध तपेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे. यह मंदिर तातापानी में है, जो अपने गर्म पानी के कुंडों के लिए भी जाना जाता है.

प्रदेश की सुख-शांति के लिए की कामना, भक्तों संग किया संवाद
मंत्री रामविचार नेताम ने बड़े ही श्रद्धा भाव से भगवान शिवशंकर की पूजा-अर्चना की. उन्होंने इस दौरान सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की. इसके बाद उन्होंने एक नेक काम भी किया. तपेश्वर महादेव की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं और शिवभक्त कांवड़ यात्रियों के लिए उन्होंने भंडारे का आयोजन कराया. खुद अपने हाथों से प्रसाद बांटा और भक्तों के साथ घुल-मिलकर बातें कीं. उन्होंने श्रद्धालुओं से उनकी यात्रा के अनुभव पूछे और उनकी अटूट आस्था को दिल से नमन किया.

छत्तीसगढ़ में सावन की भक्ति है कुछ खास!
इस मौके पर मंत्री नेताम ने सावन के महीने के महत्व पर भी बात की. उन्होंने कहा कि यूं तो सावन का महीना पूरे भारत में शिव आराधना का पवित्र समय माना जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ की धरती पर इसकी अनुभूति कुछ और ही खास होती है. उन्होंने समझाया कि यहां भक्ति सिर्फ आस्था नहीं है, बल्कि जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है. मंत्री जी ने तपेश्वर धाम को इस परंपरा का जीता-जागता प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि यह जगह सिर्फ एक धार्मिक केंद्र नहीं है, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

स्थानीय कलाकारों का सम्मान: संस्कृति के सच्चे संवाहक
मंत्री नेताम ने इस दौरान वहां मौजूद कलाकारों का भी खूब उत्साह बढ़ाया. उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति जैसे बड़े त्योहारों पर जब देशभर से कलाकार तपेश्वर धाम आते हैं, तो यह जगह एक विशाल सांस्कृतिक रंगमंच में बदल जाती है. और आज उसी मंच पर हमारे स्थानीय कलाकार अपनी मिट्टी की खुशबू, अपनी विरासत और अपने संस्कारों को जीवंत कर रहे हैं.

उन्होंने कलाकारों के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “हमारे स्थानीय कलाकार सिर्फ हमारा मनोरंजन नहीं करते, वे हमारे समाज की यादें हैं. वे हमारी संस्कृति के सच्चे संवाहक हैं. उनकी कला हमारी पीढ़ियों की पहचान है.” यह बात उन्होंने कहकर उन कलाकारों को सम्मान दिया जो अपनी कला के माध्यम से हमारी परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं.

कुल मिलाकर, कृषि मंत्री रामविचार नेताम का तपेश्वर धाम दौरा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं था, बल्कि यह जनता के साथ जुड़ने, उनकी आस्था को सम्मान देने और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने का भी एक प्रयास था. यह दिखाता है कि कैसे जनप्रतिनिधि सिर्फ सरकारी कामकाज तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग लेते हैं.

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