जितेंद्र साहू धमतरी नागपंचमी के शुभ अवसर पर Chhattisgarh के Dhamtari जिले से एक हैरान कर देने वाला दृश्य सामने आया है, जिसने श्रद्धालुओं की आस्था को और भी मजबूत कर दिया है। नगरी इलाके के भारत माता चौक स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में आज सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब श्रद्धालुओं ने शिवलिंग से लिपटे हुए एक जीवित नाग को देखा। इस अद्भुत दृश्य का वीडियो कुछ ही घंटों में social media पर जमकर वायरल हो गया है।
शिवलिंग से लिपट गया नागराज, श्रद्धालु बोले- यह साक्षात चमत्कार!
नागपंचमी जैसे पावन दिन पर जब लोग मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए जुटे थे, तभी मंदिर परिसर में अचानक एक नाग प्रकट हुआ और धीरे-धीरे शिवलिंग से लिपट गया। यह नजारा देखकर लोग आश्चर्यचकित रह गए और तुरंत अपने मोबाइल कैमरों से वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
मंदिर के पुजारी के अनुसार, “ऐसा दृश्य पहली बार देखने को मिला है। यह स्वयं नागदेवता की उपस्थिति का संकेत हो सकता है।”
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो, श्रद्धालु उमड़ पड़े
जैसे ही यह खबर फैली, आसपास के गांवों से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर पहुंचने लगी। कई लोगों ने इसे “भोलेनाथ का चमत्कार” बताया और नतमस्तक होकर दर्शन किए। वीडियो में साफ दिख रहा है कि नाग बिना किसी आक्रामकता के धीरे-धीरे शिवलिंग से लिपटा हुआ है और कई मिनटों तक वहीं शांत बैठा रहा।
लोगों का कहना है कि यह एक दुर्लभ दृश्य है और नागपंचमी जैसे खास मौके पर इसे देखना किसी सौभाग्य से कम नहीं।
सावन में भोलेनाथ की विशेष कृपा
बता दें कि अभी सावन का महीना चल रहा है, जो भोलेनाथ की भक्ति का सबसे पावन समय माना जाता है। इस पूरे महीने में भक्त हर सोमवार को व्रत रखते हैं, कांवड़ यात्रा करते हैं और जलाभिषेक करते हैं।
नागपंचमी भी सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आती है, और इस दिन नागों की पूजा का विशेष महत्व होता है।
इस मौके पर मंदिरों में “हर हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारे गूंज रहे हैं। हजारों की संख्या में कांवड़िए नदी-तालाबों से पवित्र जल लेकर शिव मंदिरों में भोलेनाथ का अभिषेक कर रहे हैं।
Nagpanchami पर क्या है नाग की पूजा का महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। कहा जाता है कि इस दिन नागों को दूध चढ़ाना, कच्चा दूध और हल्दी से बने चित्रों की पूजा करना शुभ होता है।
और जब इसी दिन कोई जीवित नाग इस तरह प्रकट होकर स्वयं शिवलिंग से लिपट जाए, तो इसे “शिव और नाग के पावन मिलन” का प्रतीक माना जाता है।
श्रद्धालु बोले- यह है आस्था का अद्भुत पल
मंदिर में पहुंचे एक श्रद्धालु ने बताया, “हम रोज दर्शन के लिए आते हैं लेकिन आज जो देखा, वह जीवन में पहली बार देखा है। भोलेनाथ ने साक्षात दर्शन दिए हैं।”
निष्कर्ष:
नागपंचमी के इस पावन दिन पर धमतरी के नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में जो दृश्य देखने को मिला, वह भक्तों की आस्था को नई ऊंचाई देता है। यह केवल एक धार्मिक घटना नहीं बल्कि लोगों के विश्वास, श्रद्धा और संस्कृति का जीवंत उदाहरण बन गया है।