देशभर में करवा चौथ Karwa Chauth story का पर्व बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और रात को चांद देखकर पूजा करती हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक ऐसा कस्बा है, जहां आज भी महिलाएं यह व्रत नहीं रखतीं। इस जगह का नाम है सुरीर कस्बा, जो अपनी अनोखी परंपरा और मान्यता के कारण चर्चाओं में रहता है।
Table of Contents
करवा चौथ की जगह यहां है सती के श्राप का डर
सुरीर कस्बे के वघा मोहल्ले में रहने वाली महिलाएं न तो करवा चौथ का व्रत रखती हैं और न ही अहोई अष्टमी का। ऐसा नहीं है कि उन्हें इन व्रतों की महत्ता का ज्ञान नहीं, बल्कि इसके पीछे एक करीब 200 साल पुरानी सती माता की कथा और श्राप जुड़ा हुआ है। Karwa Chauth story
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, करीब दो शताब्दियां पहले नौहझील क्षेत्र के रामनगला गांव का एक ब्राह्मण युवक अपनी पत्नी को गौना कराकर भैंसा बुग्गी से सुरीर ला रहा था। रास्ते में कुछ ठाकुरों से विवाद हुआ और उन्होंने युवक की हत्या कर दी। यह देख उसकी पत्नी ने अपने पति के शव के साथ वहीं सती हो गई। Karwa Chauth story
सती होने से पहले उस महिला ने इलाके के लोगों को श्राप दिया कि इस मोहल्ले में कोई भी सुहागन महिला करवाचौथ या अहोई अष्टमी का व्रत रखेगी तो उसका पति असमय मृत्यु को प्राप्त करेगा। Karwa Chauth story
श्राप के डर से जन्मी अनोखी परंपरा
कहते हैं, सती के श्राप के बाद कई नवविवाहिताओं के पति असमय चल बसे। इससे पूरे कस्बे में भय और शोक का माहौल फैल गया। तब से ही लोगों ने यह संकल्प ले लिया कि वे करवा चौथ और अहोई अष्टमी के व्रत नहीं रखेंगे, ताकि किसी का वैवाहिक जीवन संकट में न पड़े। Karwa Chauth story
https://twitter.com/DainikHistory?t=un2EfdiIG8L5BD8EkPp2qg&s=08
इस परंपरा का पालन आज भी कस्बे की महिलाएं पूरी आस्था से करती हैं। यहां तक कि वे करवा चौथ के दिन सोलह श्रृंगार भी नहीं करतीं। Karwa Chauth story
“श्राप नहीं, अब सती माता का आशीर्वाद मानते हैं”
वघा मोहल्ले की 104 वर्षीय सुनहरी देवी बताती हैं कि यह परंपरा बहुत पुरानी है। यहां की महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना तो करती हैं, लेकिन व्रत नहीं रखतीं। सुनहरी देवी कहती हैं, “हम बचपन से यही देख रहे हैं, कोई भी महिला करवाचौथ का व्रत नहीं करती। बस सती माता के मंदिर जाकर मन ही मन प्रार्थना कर लेती है।” Karwa Chauth story
हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें
https://whatsapp.com/channel/0029Vb5z2AY4Y9lmfuxMMQ0o
Join Arattai channel https://aratt.ai/@dainik_history
वहीं, नवविवाहिता रीता सिंह और सपना देवी कहती हैं कि जब उन्होंने शादी के बाद पहली बार सुना कि कस्बे में करवाचौथ नहीं मनाया जाता, तो बहुत हैरानी हुई। शुरुआत में दुख भी हुआ, लेकिन बाद में उन्होंने इसे परंपरा का हिस्सा मानकर स्वीकार कर लिया।
अब यहां की महिलाएं इस प्रथा को श्राप नहीं बल्कि सती माता का आशीर्वाद मानती हैं। वे मानती हैं कि सती माता की कृपा से ही उनका परिवार सुरक्षित और सुखी है। Karwa Chauth story
सती माता का मंदिर, जहां हर जाति के लोग करते हैं दर्शन
सुरीर कस्बे में आज भी सती माता का मंदिर स्थित है। यह वही स्थान माना जाता है जहां उस महिला ने सती होकर श्राप दिया था। अब इस जगह को श्रद्धा का केंद्र माना जाता है। विवाह, मांगलिक कार्य या अन्य शुभ अवसरों पर यहां सभी जातियों के लोग आकर सती माता का आशीर्वाद लेते हैं। Karwa Chauth story
यहां के बुजुर्ग बताते हैं कि रामनगला गांव के लोग आज भी सुरीर में न तो खाना खाते हैं और न पानी पीते हैं। वे सती माता की इस मान्यता को आज भी उतनी ही श्रद्धा से निभाते हैं जितनी सदियों पहले निभाई जाती थी।
आस्था और परंपरा का संगम है सुरीर
सुरीर कस्बे की यह परंपरा भले ही आज के समय में लोगों को अजीब लगे, लेकिन यहां के लोगों के लिए यह आस्था और विश्वास का प्रतीक है। गांव के बुजुर्गों का मानना है कि “यह सती माता की कृपा है, जिसने आज तक कस्बे को किसी बड़ी विपत्ति से बचाए रखा है।”
जहां एक ओर देशभर में करवा चौथ को सुहागिनें सोलह श्रृंगार कर मनाती हैं, वहीं मथुरा का यह कस्बा अपनी अलग पहचान बनाए हुए है — जहां महिलाएं बिना व्रत रखे ही पति की लंबी उम्र की दुआ करती हैं। Karwa Chauth story
सुरीर कस्बे की यह परंपरा सिर्फ एक मान्यता नहीं, बल्कि उस सती स्त्री के बलिदान की याद है, जिसने प्रेम और निष्ठा की मिसाल पेश की थी। भले ही यह मान्यता डर से शुरू हुई हो, लेकिन आज यह कस्बे की सांस्कृतिक विरासत और आस्था का प्रतीक बन चुकी है।