उज्जैन। श्रावण मास के पवित्र अवसर पर सोमवार को उज्जैन में भगवान महाकाल की दूसरी सवारी धूमधाम और श्रद्धा के साथ निकाली गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं नंगे पांव बाबा की आराधना करते हुए पूरे सवारी मार्ग पर डमरु और झांझ मंजीरे बजाते पैदल चले। भगवान श्री महाकालेश्वर इस बार चन्द्रमोलेश्वर स्वरूप में पालकी पर सवार होकर और मनमहेश स्वरूप में हाथी पर आरूढ़ होकर नगर भ्रमण पर निकले।
सवारी की शुरुआत से पहले सभा मंडप में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पालकी का षोडशोपचार विधि से पूजन-अर्चन किया और आरती उतारी। साथ ही उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, महापौर मुकेश टटवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी पूजन कर बाबा के दर्शन किए।
जनजातीय लोकनृत्य बना आकर्षण का केंद्र
इस बार सवारी को और भव्य बनाने की पहल खुद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की थी। उनकी मंशा अनुसार देशभर से आए 08 जनजातीय कलाकारों के दलों ने परंपरागत लोकनृत्य प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। नासिक (महाराष्ट्र) से सौगी मुखोटा नृत्य, हरियाणा से हरियाणवी घूमर, राजस्थान से घूमरा नृत्य, छतरपुर से बरेदी, झाबुआ से भगोरिया, गुजरात से राठ, ओडिशा से शंख ध्वनि और छत्तीसगढ़ से लोकपंथी नृत्य की प्रस्तुतियां की गईं।
पुलिस बैंड ने बांधा भक्ति का रंग
सवारी में इस बार 350 पुलिस जवानों ने भक्ति बैंड की प्रस्तुति दी, जिसमें “ॐ नमः शिवाय”, “हर हर शंभू”, “ॐ जय शिव ओंकारा” जैसे शिव भजनों की मधुर धुनों पर श्रद्धालु झूम उठे। सारा उज्जैन शहर शिवमय हो गया और “जय श्री महाकाल” के जयकारों से गूंज उठा।
शिव भक्तों की भीड़, श्रद्धा की बयार
हजारों की संख्या में भक्त महाकाल की झलक पाने के लिए उमड़ पड़े। शहर भर में फूलों की वर्षा हुई और भक्त झांझ, ढोल, मंजीरे, डमरू बजाते हुए भगवान की पालकी के साथ चले। बाहर से आए भक्तों ने भी बाबा के दर्शन कर पुण्य लाभ लिया। वहीं, स्कूली बच्चों ने घोष वादन से वातावरण को भक्तिमय कर दिया।
रामघाट पर हुआ पूजन, गोपाल मंदिर में हुआ विश्राम
सवारी महाकाल मंदिर से शुरू होकर गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। यहां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चन्द्रमोलेश्वर भगवान का क्षिप्रा जल से अभिषेक कर पूजन किया। इसके बाद सवारी रामानुज कोट, कार्तिक चौक, सत्यनारायण मंदिर होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची, जहां सिंधिया स्टेट की ओर से परंपरागत पूजन हुआ। बाद में सवारी मंदिर लौटकर संपन्न हुई।
एलईडी रथ से भक्तों को दिखे लाइव दर्शन
श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए चलित रथों पर एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी, जिनसे सवारी का सीधा प्रसारण हुआ और भक्तों को सवारी के स्पष्ट दर्शन मिल सके।
आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम
श्रावण माह की यह दूसरी सवारी न केवल धार्मिक भावना का प्रतीक बनी, बल्कि जनजातीय कला-संस्कृति, पुलिस बैंड की प्रस्तुतियों और मुख्यमंत्री की भक्ति भावना के कारण यह आयोजन ऐतिहासिक बन गया। सवारी के दौरान एक एम्बुलेंस को श्रद्धालुओं ने मार्ग भी दिया, जिससे सेवा और सहिष्णुता का भी सुंदर उदाहरण प्रस्तुत हुआ