गोवर्धन (मथुरा)। ब्रज की पावन भूमि पर इन दिनों सावन की हरियाली के बीच कृष्ण भक्ति की बयार बह रही है। राधाकुंड स्थित राधा गोविन्द मंदिर में मणिपुर से आए सैकड़ों भक्तों ने भक्ति और प्रेम से सराबोर होकर झूलनोत्सव मनाया। श्रीकृष्ण और राधारानी के झूला उत्सव में श्रद्धा, उत्साह और रंगों की ऐसी झलक दिखी कि हर कोई भावविभोर हो गया। (Jhoolanotsav in Radhakund: Devotees of Manipur swung with Radha-Krishna)
सैकड़ों किलोमीटर दूर मणिपुर से राधाकुंड पहुंचे श्रद्धालुओं का नेतृत्व मणिपुर के महाराजा एरावत और काल्परिशी शर्मा कर रहे थे। राधा गोविन्द मंदिर में उन्होंने रत्नों से जड़े झूले पर श्री राधा-कृष्ण को विराजमान कर बड़े ही श्रद्धा भाव से झूला झुलाया। झूले के साथ ही मंदिर परिसर भजन-कीर्तन से गूंज उठा और भक्त भाव-विभोर होकर थिरकते नजर आए।
सावन में ब्रज भूमि पर छाया कृष्ण प्रेम
झूला पड़ते ही राधा-कृष्ण की झांकी ने मानो सावन की फुहारों को और भी पवित्र बना दिया। मंदिर प्रांगण में चारों ओर फूलों की सजावट, भक्तों की टोलियां, और राधा-कृष्ण की झूले पर मोहक छवि ने हर किसी का मन मोह लिया। मणिपुर की सखियों ने पारंपरिक पोशाक में “राधा झूले, कान्हा झुलावे…” जैसे भजनों पर झूम-झूम कर अपनी श्रद्धा प्रकट की।
झूलनोत्सव का आध्यात्मिक संदेश
मणिपुर से आए महाराज एरावत ने बताया कि इस उत्सव का उद्देश्य केवल भक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का अनुभव है। उन्होंने बताया कि ब्रज की परंपरा के अनुसार जब वर्षा ऋतु आती है, तो गोपियां श्रीकृष्ण के पुनर्मिलन की खुशी में झूले सजाकर राधारानी को झुलाती हैं। इसी परंपरा को जीवंत करने के लिए मणिपुर के भक्त हर साल यहां आकर इस उत्सव में भाग लेते हैं।
उन्होंने बताया कि पूर्णिमा के दिन राधा गोविन्द मंदिर में मणिपुर का विशेष “महारास” आयोजित होगा, जिसमें मणिपुरी सखियाँ राधा-कृष्ण का स्वरूप धारण कर दिव्य रासलीला प्रस्तुत करेंगी।
ब्रज की 84 कोस यात्रा भी करेंगे मणिपुरी श्रद्धालु
काल्परिशी शर्मा ने बताया कि मणिपुर से आए भक्त ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा कर यहां के प्रमुख मंदिरों के दर्शन भी करेंगे। इसके साथ ही झूलनोत्सव और महारास के माध्यम से भक्ति भाव का विस्तार किया जाएगा।
आयोजन में ये श्रद्धालु रहे विशेष रूप से शामिल
इस अवसर पर उमाशंकर शर्मा, व्रोनरान सिंह, शांता सिंह, स्वरूप शर्मा, वसंत सिंह, सनातोम्वी देवी, नोनी देवी, जीवन माला देवी, खेदामनी देवी, याइम्ही देवी, चाऊ तोम्बी देवी, एल. नलीमा देवी, सनाहन्वी देवी, विक्टोरिया देवी (गोविंद जी व्रती सेवा अध्यक्ष), तोम्बी सना, आशालता देवी, मैमे देवी, खौगेन्द्र सिंह, इवोतोन सिंह, इवोचौ सिंह और किरन माला देवी सहित अनेक भक्त उपस्थित रहे।