सिलवानी (रायसेन)। सरकारी छात्रावासों की व्यवस्था सुधारने के लाख दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं अलग है। सिलवानी के शासकीय अनुसूचित जाति उत्कृष्ट बालक छात्रावास की हालत देखकर हर कोई दंग रह गया। हाल ही में जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की टीम वहां पहुंची तो बच्चों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए प्रशासन और अधीक्षक की लापरवाही का पूरा राज़ खोला।
बच्चों का आरोप – “सुबह खाना मिला, लेकिन शाम को भूखे रहे”
छात्रावास में रह रहे बच्चों ने बताया कि सुबह का भोजन तो दिया गया, लेकिन शाम तक खाने का इंतज़ाम ही नहीं किया गया। बच्चों ने साफ कहा कि यह स्थिति कोई नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से वे इसी तरह की परेशानी झेल रहे हैं। कई बार उन्होंने आवाज़ भी उठाई, लेकिन उनकी बातें हमेशा दबा दी गईं।
आटे और पानी में कीड़े, कमरे में गोबर
छात्रों ने बताया कि उन्हें मिलने वाला आटा तक खराब है, उसमें कीड़े पड़े रहते हैं। यही नहीं, पीने के पानी में भी कीड़े तैरते दिखाई देते हैं। हालात इतने बदतर हैं कि छात्रावास के कोचिंग रूम तक में ताज़ा और सूखा गोबर पड़ा हुआ है। जहां बच्चों को पढ़ाई करनी चाहिए, वहीं गंदगी का अंबार है।
“जहां सोते हैं, वहीं खाना भी खाना पड़ता है”
बच्चों की सबसे बड़ी समस्या है कि छात्रावास में कोई साफ-सुथरी जगह नहीं है। जहां वे सोते हैं, वहीं उन्हें खाना भी खाना पड़ता है। पंखे काम नहीं करते, लोहे के पलंगों की प्लाई टूटी हुई है और बच्चों को मजबूरी में उन्हीं पर रात गुजारनी पड़ती है। गर्मी में पसीने और मच्छरों से बेहाल ये बच्चे प्रशासन से मदद की आस लगाए हुए हैं।
अधीक्षक पर धमकी देने का आरोप
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी समस्या को लेकर ABVP टीम को बुलाया, तो अधीक्षक ने फोन पर उन्हें धमकाने की कोशिश की। यह सुनकर ABVP के पदाधिकारी भी हैरान रह गए। इतना ही नहीं, बच्चों के भूखे रहने की स्थिति देखकर ABVP की टीम ने रात में ही उनके लिए भोजन का इंतज़ाम कराया।
“अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे” – छात्रों की साफ चेतावनी
बच्चों ने साफ कहा कि वे लंबे समय से इन हालातों को बर्दाश्त कर रहे थे, लेकिन अब और चुप नहीं रहेंगे। उन्होंने प्रशासन से साफ मांग की है कि अधीक्षक पर तुरंत कार्रवाई की जाए और छात्रावास की बदहाल स्थिति को सुधारा जाए।
जिला संयोजक ने नहीं उठाया फोन
पूरे मामले पर मीडिया की टीम ने ABVP जिला संयोजक चन्द्रप्रकाश सोनी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कॉल उठाना तो दूर, वापस करना भी उचित नहीं समझा। इससे बच्चों की समस्याओं पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि आखिर इतनी गंभीर शिकायतों को अनसुना क्यों किया जा रहा है?
पहले भी सामने आ चुकी हैं लापरवाही की शिकायतें
गौर करने वाली बात यह है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले प्रतापगढ़ छात्रावास में अधीक्षक व्यास जी पर भी लापरवाही और बच्चों की उपेक्षा के आरोप लग चुके हैं। उस समय भी जिम्मेदार अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज हालात जस के तस हैं।
बड़ा सवाल – कार्रवाई होगी या बच्चों की जिंदगी अंधेरे में रहेगी?
सिलवानी छात्रावास का यह मामला सिर्फ बच्चों की समस्या नहीं है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। आखिर कब तक मासूम बच्चों को इस तरह की बदहाल और असुरक्षित व्यवस्था में रहना पड़ेगा? क्या गैरजिम्मेदार अधीक्षक पर कड़ी कार्रवाई होगी या फिर बच्चों की जिंदगी यूं ही अंधेरे में डूबी रहेगी?