सिलवानी। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के सिलवानी क्षेत्र में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। वन विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर देर रात दबिश देकर अवैध वनोपज परिवहन करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से मारुति 800 कार और ₹25,000 मूल्य की गीली सागौन की लकड़ी जब्त की गई है।
कैसे हुआ खुलासा?
वन मंडल अधिकारी सामान्य रायसेन प्रतिभा शुक्ला और उप वन मंडलाधिकारी सिलवानी इंदर सिंह वारे के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई। जानकारी के अनुसार, पश्चिम सिलवानी वन परिक्षेत्र अधिकारी महेंद्र कुमार पालेचा और उनकी टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग अवैध तरीके से लकड़ी ले जाने वाले हैं।
सूचना मिलते ही टीम ने खमरिया, खान बरेली, सिंहपुरी और कोटा के जंगल रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी। रात करीब 9 बजे ग्राम कोटा की ओर से एक मारुति 800 कार (एमपी 04 एचए 2702 नंबर प्लेट) आती हुई दिखाई दी। जब टीम ने वाहन को रोकने का इशारा किया तो कार चालक ने गाड़ी की स्पीड बढ़ाकर भागने की कोशिश की। लेकिन सतर्क वन अमले ने पीछा कर थोड़ी दूरी पर कार को रोक लिया।
कार से मिली सागौन की लकड़ी
जांच में पाया गया कि कार में गीली सागौन के 7 नग (0.314 घन मीटर) भरे हुए थे। इनका बाजार मूल्य लगभग ₹25,000 आंका गया।
गाड़ी में मौजूद दोनों व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम
दिनेश पुत्र हरिकेश (24 वर्ष)
अनिकेत पुत्र जगराम (18 वर्ष)
निवासी खमरिया, मानपुर बताए।
मौके पर ही दर्ज हुआ केस
वन विभाग की टीम ने तुरंत पंचनामा तैयार कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। मारुति 800 कार और लकड़ी को जब्त कर सिलवानी रेंज कार्यालय लाया गया। दोनों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर प्रकरण क्रमांक 47373/09 दिनांक 15 अगस्त 2025 पंजीबद्ध किया गया।
कार्रवाई में कौन-कौन रहे शामिल?
इस पूरी कार्रवाई में वन विभाग की कई टीमों ने अहम भूमिका निभाई। इनमें –
महेंद्र कुमार पालेचा (वन परिक्षेत्र अधिकारी पश्चिम सिलवानी)
कमलेश तिवारी (परिक्षेत्र सहायक समनापुर)
अमित धुर्वे, हरनारायण सिंह, परषोत्तम रजक, श्याम सिंह रघुवंशी, मनोज साहू, रमाकांत रघुवंशी, भूपेंद्र लोधी, वीरेंद्र त्रिपाठी, संकुल मौर्य (वन रक्षक)
धर्मेंद्र लोधी, नरेश और रामप्रसाद (वाहन चालक एवं सहयोगी दल)
ने सक्रिय सहयोग किया।
अवैध वनोपज पर सख्ती
वन विभाग लगातार जंगलों से अवैध वनोपज परिवहन पर नकेल कसने में जुटा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि जंगलों की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।