देवरी रिछावर और रामपुरा गांव के लगभग 200 बच्चों को आखिरकार स्कूल पहुंचने की उम्मीद जगी है। दैनिक हिस्ट्री में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया है और जिस रास्ते पर पिछले 15 दिनों से कीचड़ और ट्रैक्टरों के कारण स्कूल जाना मुश्किल हो गया था, वहां अब मुरम डाली जा रही है। प्रशासन के इस कदम से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
दरअसल, इन दोनों गांवों में बने मूंग तुलाई केंद्र के कारण रास्ता पूरी तरह जाम हो गया था। जहां पहले किसान मूंग लेकर पहुंचते थे, अब वहां कीचड़ और ट्रैक्टरों की भरमार के कारण रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया था। यही वजह रही कि करीब 200 बच्चे पिछले 15 दिनों से स्कूल नहीं जा पा रहे थे। अभिभावकों और ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दैनिक हिस्ट्री की खबर ने बदली तस्वीर
मीडिया की ताकत एक बार फिर सामने आई। जब दैनिक हिस्ट्री ने लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, तो प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया। अब ठेकेदार और नगर परिषद के कर्मचारी मौके पर मौजूद हैं और रास्ते के किनारे मुरम डाली जा रही है ताकि रास्ता कुछ हद तक चालू हो सके।
नगर परिषद के सीएमओ जगदीश शर्मा खुद मौके पर मौजूद हैं और काम की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने सड़क किनारे कुर्सी डालकर पूरी कार्यवाही अपनी आंखों के सामने शुरू करवाई है। हालांकि रास्ता अभी पूरी तरह से साफ नहीं हुआ है, लेकिन प्रयास तेजी से चल रहे हैं।
अभी भी कई समस्याएं बनी हुई हैं
जहां एक ओर मुरम डालकर सड़क सुधारने का काम शुरू हो चुका है, वहीं दूसरी ओर ट्रैक्टरों की मौजूदगी और भारी कीचड़ के कारण मशीने और मज़दूरों को काम करने में काफी दिक्कत हो रही है। बड़े-बड़े गड्ढों में फंसी गाड़ियाँ अब भी समस्या बनी हुई हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि इस रास्ते को पूरी तरह से चालू किया जाए ताकि बच्चों को रोजाना स्कूल जाने में कोई दिक्कत न हो। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही यह रास्ता पूरी तरह से उपयोग लायक बना दिया जाएगा।
कलेक्टर नहीं पहुंचे, ग्रामीणों में नाराजगी
हालांकि प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाए गए हैं, लेकिन जिला कलेक्टर की गैर-मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि कलेक्टर खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेंगे, लेकिन वे उदयपुरा से ही वापस लौट गए। इससे लोगों में निराशा फैल गई है।
ग्रामीणों की अपील: बच्चों की पढ़ाई न रुके
गांव के कई अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई पहले ही बहुत प्रभावित हो चुकी है। अब जब रास्ता बन रहा है, तो प्रशासन को इसे पूरी तरह से दुरुस्त कर देना चाहिए। गांव की बच्चियों और छोटे बच्चों के लिए कीचड़ से गुजरना बेहद मुश्किल है। उन्हें स्कूल पहुंचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है।
अंतिम शब्द
अब देखना ये है कि प्रशासन अपने वादों पर कितना खरा उतरता है और कब तक यह रास्ता पूरी तरह से साफ होकर आम जनता और बच्चों के लिए सुगम बनता है। फिलहाल स्थिति में सुधार की दिशा में पहला कदम जरूर उठाया गया है, जिसकी ग्रामीणों ने सराहना की है।