मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ई-अटेंडेंस (डिजिटल हाज़िरी) लागू किए जाने का शिक्षकों द्वारा ज़ोरदार विरोध किया जा रहा है। इसी कड़ी में गुरुवार को सिलवानी में आजाद स्कूल अतिथि शिक्षक संघ ने भी इस फरमान के खिलाफ आवाज़ उठाई। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम SDM को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने ई-अटेंडेंस को अन्यायपूर्ण बताते हुए अपनी कई मांगों को पूरा करने की अपील की।
“मोबाइल नहीं, रिचार्ज के पैसे नहीं, तो अटेंडेंस कैसे लगाएं?”
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 से ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दिया गया है, जो उनके साथ सरासर अन्याय है। ज्ञापन में उन्होंने साफ-साफ कहा है कि ई-अटेंडेंस लागू करने से पहले उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।
उनकी सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि 80 प्रतिशत से ज़्यादा अतिथि शिक्षकों के पास एंड्रॉइड मोबाइल नहीं है। वे सवाल उठा रहे हैं कि जब उनके पास स्मार्टफोन ही नहीं हैं, तो वे अटेंडेंस कैसे लगाएंगे? उन्होंने मांग की है कि सरकार उन्हें एंड्रॉइड मोबाइल खरीदने के लिए कम से कम 20,000 रुपये की राशि उनके खाते में दे। इसके अलावा, उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वे मोबाइल रिचार्ज कराने में भी असमर्थ हैं। उन्होंने मांग की है कि प्रतिमाह रिचार्ज के लिए कम से कम 500 रुपये की राशि उनके खाते में डाली जाए।
“मानसिक रूप से परेशान हैं अतिथि शिक्षक, हमें भी मिले सुविधाएं!”
अतिथि शिक्षकों ने ज्ञापन में अपनी कई और पुरानी मांगों को भी दोहराया है:
समय पर मानदेय: उन्हें हर महीने एक निश्चित तारीख पर मानदेय (सैलरी) दिया जाए। अभी उन्हें सैलरी के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ता है।
अवकाश की सुविधा: सरकारी कर्मचारियों की तरह उन्हें भी सभी प्रकार के अवकाश (जैसे मेडिकल लीव, प्रसूति अवकाश, पितृत्व अवकाश, आकस्मिक अवकाश) की सुविधा दी जाए।
नेटवर्क की समस्या: ग्रामीण इलाकों में जहां नेटवर्क नहीं आता, वहां नेटवर्क सुविधा उपलब्ध कराई जाए ताकि ई-अटेंडेंस में दिक्कत न आए।
सुरक्षित भविष्य: अतिथि शिक्षकों का वार्षिक अनुबंध सुरक्षित किया जाए, ताकि हर साल नौकरी छूटने का डर न रहे।
सरकारी सुविधाएं: नियमित कर्मचारियों की तरह उन्हें भी सरकार की सभी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिले।
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि ई-अटेंडेंस को लेकर वे मानसिक रूप से बहुत त्रस्त और परेशान हैं। उन्होंने मांग की है कि पहले इन सभी समस्याओं को सुलझाया जाए, और उसके बाद ही ई-अटेंडेंस लागू करने का आदेश जारी किया जाए। साथ ही, उन्होंने वर्तमान में जारी ई-अटेंडेंस के आदेश को वापस लेने की भी अपील की है।
सरकार तक पहुंची आवाज़
ज्ञापन की एक-एक कॉपी शिक्षामंत्री, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश भोपाल, और आयुक्त लोकशिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश को भी भेजी गई है, ताकि उनकी बात सीधे बड़े अधिकारियों तक पहुंच सके।
ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक मौजूद थे, जो एकजुट होकर अपनी मांगों पर ज़ोर दे रहे थे। अब देखना यह होगा कि सरकार अतिथि शिक्षकों की इन जायज़ मांगों पर क्या रुख अपनाती है। क्या उनकी समस्याओं का समाधान कर ई-अटेंडेंस को सुचारु रूप से लागू किया जाएगा, या फिर यह विवाद और बढ़ेगा?