लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया है। अब गाजियाबाद के मोदीनगर में डॉ. केएन मोदी विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने विश्वविद्यालय को संचालन की औपचारिक अनुमति दे दी है। बुधवार को राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों को संचालन प्राधिकर पत्र सौंपा।
यह मंजूरी तब दी गई जब विश्वविद्यालय को उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश 2025 के तहत 2019 के अधिनियम की अनुसूची-2 में क्रम संख्या 49 पर शामिल किया गया। इसके साथ ही इसे वैधानिक मान्यता भी मिल गई, जिससे अब यह विश्वविद्यालय आधिकारिक रूप से अपना संचालन शुरू कर सकता है।
उच्च शिक्षा को मिलेगा नया मुकाम
इस अवसर पर मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि डॉ. केएन मोदी जैसे प्रतिष्ठित समूह द्वारा विश्वविद्यालय की स्थापना गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा, “योगी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, नवाचार और बुनियादी ढांचे के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। यह निर्णय उसी नीति का हिस्सा है।”
उन्होने यह भी स्पष्ट किया कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत राज्य सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या में वृद्धि करने और उन्हें वैश्विक स्तर की शिक्षा सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा लाभ
गाजियाबाद के मोदीनगर क्षेत्र में डॉ. केएन मोदी विश्वविद्यालय की स्थापना से न केवल क्षेत्रीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर विकल्प मिलेगा, बल्कि उन्हें अब दूसरे शहरों की ओर रुख भी नहीं करना पड़ेगा। इससे छात्रों के समय और संसाधनों की भी बचत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालय के आने से स्थानीय रोजगार के अवसरों में भी इजाफा होगा। शिक्षकों, प्रशासनिक स्टाफ, तकनीकी विशेषज्ञों से लेकर सहयोगी सेवाओं तक हजारों लोगों को इससे रोजगार मिलने की संभावना है।
निजी भागीदारी से होगा शिक्षा का विस्तार
उत्तर प्रदेश सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र को और अधिक मजबूत बना रही है। सरकार का मानना है कि यदि गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ निजी संस्थान उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे आएं तो इससे छात्रों को बेहतर विकल्प और सुविधाएं मिलेंगी।
डॉ. केएन मोदी विश्वविद्यालय का उदाहरण इसका उत्तम प्रमाण है, जो वर्षों से तकनीकी, प्रबंधन, और पेशेवर शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता की मिसाल रहा है।
प्रदेश बनेगा शिक्षा का केंद्र
योगी सरकार के इस निर्णय को शिक्षा विशेषज्ञ उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्रांति की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम मान रहे हैं। राज्य पहले ही इंजीनियरिंग, मेडिकल और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से प्रगति कर रहा है, और अब निजी विश्वविद्यालयों के माध्यम से वह वैश्विक शिक्षा मानकों की ओर बढ़ रहा है।