मथुरा। जब बात विज्ञान की हो और उसमें बच्चों की जिज्ञासा और रचनात्मकता जुड़ जाए, तो परिणाम वाकई प्रेरणादायक होते हैं। मथुरा के डीएवी इंटर कॉलेज में आयोजित जनपद स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में बलदेव विकास खंड के ग्रामीण अंचलों से आए परिषदीय विद्यालयों के छात्रों ने अपने विज्ञान मॉडल्स के दम पर न केवल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि पूरे जिले में अपने क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया
ग्रामीण बच्चों ने दिखाया कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं
बलदेव ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय गढ़ी खुंदी और नगला अकोस के छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शनी में अपने विज्ञान प्रोजेक्ट्स के साथ हिस्सा लिया। ये विद्यालय उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में संचालित होते हैं, जहां संसाधनों की सीमाएं होती हैं, लेकिन छात्रों की लगन और जिज्ञासा ने हर चुनौती को पीछे छोड़ दिया।
छात्रों ने “इंस्पायर अवार्ड मानक योजना” के अंतर्गत नवाचार और खोजपरक परियोजनाओं के मॉडल प्रदर्शित किए। कुमारी रश्मि, रितु और प्रशांत छौंकर जैसे बाल वैज्ञानिकों के प्रोजेक्ट्स को देखकर दर्शक ही नहीं, विशेषज्ञ भी दंग रह गए।
मुख्य अतिथि ने की बच्चों की खुलकर सराहना
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. मुकेश चंद्र अग्रवाल, जो संयुक्त शिक्षा निदेशक (आगरा मंडल) और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान मथुरा के प्राचार्य हैं, ने सभी मॉडलों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उनके मॉडलों में उपयोग की गई तकनीक की प्रशंसा करते हुए कहा,
“इन ग्रामीण बच्चों ने यह साबित कर दिया है कि जिज्ञासा और मेहनत से कुछ भी संभव है। ये भविष्य के वैज्ञानिक हैं।”
अधिकारियों और शिक्षकों ने बढ़ाया हौसला
प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कैलाश प्रसाद शुक्ला, खंड शिक्षा अधिकारी कौशल कुमार, और सह जिला विद्यालय निरीक्षक यशपाल सिंह ने भी छात्रों के उत्साह की सराहना की। उन्होंने कहा कि छात्रों का यह उत्साह और वैज्ञानिक दृष्टिकोण देश के लिए शुभ संकेत है। इन बच्चों को यदि उचित मार्गदर्शन और प्लेटफॉर्म मिले, तो ये बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
मेंटर्स को भी मिला सम्मान
छात्रों की सफलता के पीछे उनके मेंटर्स की अहम भूमिका रही। इस उपलब्धि पर छात्रों के गाइड शिक्षक डॉ. सूरज प्रताप सिंह, अरुणा शर्मा और दिनेश कुमार को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्हें छात्रों को प्रेरित करने और उत्कृष्ट मॉडल तैयार कराने के लिए पटका पहनाकर सम्मान दिया गया।
बच्चों के मॉडल्स बने चर्चा का विषय
प्रदर्शनी में बाल वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत मॉडल्स जैसे – सोलर एनर्जी का स्मार्ट उपयोग, वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, और इको-फ्रेंडली टेक्नोलॉजी जैसे प्रोजेक्ट्स खास आकर्षण का केंद्र रहे। इन मॉडलों को बनाने में बच्चों ने स्थानीय सामग्री का भी खूब इस्तेमाल किया, जिससे उनकी नवाचार क्षमता झलकी।
भविष्य की वैज्ञानिक प्रतिभाओं को मिला नया मंच
इस आयोजन ने साबित कर दिया कि अगर अवसर मिले तो सरकारी स्कूलों के बच्चे भी बड़ी वैज्ञानिक सोच विकसित कर सकते हैं। यह विज्ञान प्रदर्शनी न केवल ज्ञान का आदान-प्रदान करने का माध्यम बनी, बल्कि इन बच्चों के आत्मविश्वास को भी नई उड़ान दी।