देवरी (मध्यप्रदेश)।
शिक्षा को लेकर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन देवरी क्षेत्र के रम्पुरा और रिछावर गांवों के करीब 200 बच्चों की पढ़ाई सिर्फ इसलिए रुक गई है क्योंकि उनका स्कूल जाने का रास्ता बंद हो चुका है। शनिवार को बच्चों को मजबूरी में सड़क पर उतरना पड़ा, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। वेयरहाउस के पास खड़े रहकर बच्चे बस यही उम्मीद करते रहे कि कोई आकर उनकी बात सुनेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
एसडीएम ने दिया आश्वासन, सोमवार तक रास्ता होगा चालू
बच्चों की परेशानी को देखते हुए जब मामला बढ़ा तो बरेली एसडीएम संतोष मुद्गल ने हस्तक्षेप करते हुए आश्वासन दिया कि सोमवार तक हर हाल में रास्ता चालू करवा दिया जाएगा ताकि बच्चे स्कूल जा सकें। वहीं बच्चों का कहना है कि अगर सोमवार तक रास्ता नहीं खुला तो वे सड़क पर आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
अब गांव वालों को जिला कलेक्टर और राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल से उम्मीद है कि वे जल्द हस्तक्षेप कर रास्ता खुलवाएंगे और बच्चों की पढ़ाई दोबारा पटरी पर आ सकेगी।
20 दिन से बंद रास्ता, मंत्री तक पहुंची गुहार
रिछावर और रम्पुरा गांव के लोगों ने उदयपुरा विधानसभा से राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल से हाथ जोड़कर अपील की है कि गांव का मुख्य रास्ता पिछले 20 दिनों से बंद पड़ा है, जिससे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर कई बार जिला और तहसील के अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
गांववालों का कहना है कि नेता सिर्फ चुनाव के वक्त ही दिखाई देते हैं। अब जब बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है और 10वीं-12वीं के छात्र मानसिक तनाव झेल रहे हैं, तब कोई उनकी सुध लेने नहीं आ रहा। हालत इतनी खराब है कि अगर किसी को इमरजेंसी में अस्पताल ले जाना पड़े, तो वह भी मुमकिन नहीं है, क्योंकि रास्ता इतना जर्जर हो गया है कि वाहन या तो फंस जाते हैं या पलटने की नौबत आ जाती है।
समस्या की जड़ में मूंग तुलाई केंद्र और पाइपलाइन प्रोजेक्ट
दरअसल, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी मुख्य सड़क के किनारे मां रेवा वेयरहाउस में मूंग तुलाई केंद्र बना दिया गया है। यहां वाहनों को खड़ा करने की पर्याप्त जगह नहीं है, जिससे ट्रैक्टर और अन्य गाड़ियां रोड पर ही खड़ी रहती हैं। इससे रोजाना जाम की स्थिति बन रही है और दो गांवों का संपर्क नगर से टूट गया है।
यह स्थिति और भी गंभीर हो गई है नगर परिषद देवरी की 20 करोड़ की नर्मदा पाइपलाइन परियोजना के कारण, जिसमें सड़क के किनारे की जमीन को खोद दिया गया है। इससे रास्ते में मिट्टी जमा हो गई है, जिसके चलते ट्रैक्टर फंस रहे हैं और राहगीर फिसलकर गिर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब वेयरहाउस बनाया गया था, तब अधिकारियों ने कोई निरीक्षण नहीं किया। न ही किसानों या वाहन चालकों को दिशा-निर्देश दिए गए कि गाड़ियां कहां खड़ी करनी हैं।
प्रशासन को पहले ही दी गई थी जानकारी ग्रामीणों ने यह भी बताया कि वे कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर चुके हैं। 181 पर शिकायतें भी की गई हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की फीस तो लग रही है, लेकिन वे स्कूल नहीं जा पा रहे। शिक्षक भी कह रहे हैं कि स्कूल खुला है, लेकिन रास्ता बंद है तो हम क्या करें?
अब गांव वालों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई तो वे सड़क पर उतरेंगे। बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की ज़िंदगी, दोनों इस रास्ते पर निर्भर हैं।