सिलवानी, रायसेन में एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां काले हिरण (ब्लैकबक) के शिकार का खुलासा हुआ है। यह मामला 15 अप्रैल 2025 को संदिग्ध मांस मिलने के बाद सामने आया, जब वन विभाग की टीम ने मांस के सैंपल जबलपुर की पशु चिकित्सा व विज्ञान विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला भेजे। जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि यह मांस दुर्लभ वन्य प्राणी ‘काला हिरण’ का है।
आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी
वन विभाग की टीम ने 24 मई 2025 को चलाए गए विशेष अभियान में काले हिरण के शिकार के आरोपी फैज़ल उर्फ खालिक को गिरफ्तार किया। फैज़ल को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। इसके बाद, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और सोशल मीडिया की मदद से जांच आगे बढ़ाई गई। दक्षिण वनमंडल सागर के अफसरों ने आरोपी अनुकरण सिंह दांगी (निवासी बुड़नू, जिला सागर) को भी हिरासत में लिया।
आरोपी के पास से बरामद हुई अवैध सामग्री
पूछताछ के लिए सिलवानी लाया गया, जहां उसके घर से बड़ी मात्रा में वन्य प्राणी से जुड़ी सामग्री बरामद की गई। आरोपी के खिलाफ वन अपराध की एक और एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
फरार आरोपियों की तलाश
जांच में पता चला है कि इस केस में शामिल दो अन्य आरोपी – मोहम्मद फैज़ और मोहम्मद साद, दोनों सिलवानी निवासी, पहले ही उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत ले चुके हैं। जबकि बाकी दो आरोपी – नोमान और साहिल दांगी, अब भी फरार हैं। पुलिस और वन विभाग की टीमें लगातार इनकी तलाश कर रही हैं।
अफसरों की मुस्तैदी से खुला पूरा मामला
इस पूरे मामले में सिलवानी वनमंडल के उपवनमंडल अधिकारी इंद्र सिंह बागे, परिक्षेत्र अधिकारी आदर्श मिश्रा, दक्षिण सागर के वन अधिकारी रवि सिंह भदौरिया, बीट प्रभारी भूपेश सिंह चौधरी और अन्य स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा। इन्होंने साक्ष्य जुटाने, ट्रैकिंग और आरोपियों तक पहुंचने में बड़ी मेहनत की।
वन विभाग की कार्रवाई
वन विभाग के अनुसार, इस केस में और भी जानकारी सामने आ सकती है क्योंकि जांच अब भी जारी है। यह कार्रवाई न केवल वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी थी, बल्कि शिकारी गिरोहों पर सख्ती से लगाम लगाने के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है।