महेंद्र पाल सिंह छत्तीसगढ़ , माउंट आबू/आबू रोड। Royal Family Spiritual Retreat राजस्थान के मशहूर हिल स्टेशन माउंट आबू इन दिनों शाही रंग में रंगा हुआ है। यहां देशभर के कई राजघरानों के राजा-महाराजा और शाही परिवार के सदस्य पहुंचे। रॉयल फैमिली स्प्रीचुअल रिट्रीट के दूसरे दिन शाही परिवार ने माउंट आबू स्थित ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय के ज्ञान सरोवर, पांडव भवन और दिलवाड़ा मंदिर का भ्रमण किया
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इस मौके पर छत्तीसगढ़ सरगुजा-अंबिकापुर के महाराजा और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव भी शामिल हुए। सुबह सभी शाही परिवार के सदस्य मनमोहिनी वन स्थित ग्लोबल ऑडिटोरियम में हुए राजयोग ध्यान सत्र में शामिल हुए। सुबह 7:30 से 8:30 बजे तक चले इस सत्र में सबने ध्यान किया और गहन शांति का अनुभव लिया। Royal Family Spiritual Retreat
शाही परिवार ने साझा किए अनुभव
ध्यान सत्र के बाद सभी शाही परिवार माउंट आबू की सैर पर निकले। उन्होंने ज्ञान सरोवर एकेडमी, पांडव भवन और दिलवाड़ा मंदिर में दर्शन किए। पांडव भवन में मिली शांति और सुकून ने सभी को प्रभावित किया। इसके बाद ज्ञान सरोवर में शाही परिवारों का स्नेह मिलन हुआ, जहां सबने अपने अनुभव साझा किए। Royal Family Spiritual Retreat
कार्यक्रम के समापन पर ब्रह्माकुमारीज़ के अतिरिक्त महासचिव बीके डॉ. मृत्युंजय भाई और ज्ञान सरोवर की निदेशिका प्रभा दीदी ने सभी को मोमेंटो देकर सम्मानित किया। Royal Family Spiritual Retreat
राजयोग ध्यान सत्र में मिले अध्यात्मिक संदेश
राजयोग ध्यान सत्र के दौरान ब्रह्माकुमारीज़ की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका बीके जयंती दीदी ने कहा –
“हर आत्मा खुशी चाहती है क्योंकि खुशी हमारा स्वभाव है। हमें ऐसे कर्म करने चाहिए, जिससे दूसरों को भी खुशी मिले।”
उन्होंने बताया कि आत्मा को भूल जाने के कारण ही इंसान अपने असली गुणों से दूर हो जाता है। सत्र में बीके डेविड भाई ने मधुर संगीत प्रस्तुत किया, जिससे वातावरण और भी शांतिपूर्ण हो गया। Royal Family Spiritual Retreat
मन, वाणी और कर्म में संतुलन जरूरी
इस ध्यान सत्र में अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर बीके ऊषा दीदी ने जीवन की तीन अहम क्रियाओं – सोचना, बोलना और करना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज ये तीनों अलग-अलग दिशा में हैं, इसी वजह से जीवन में शांति नहीं है।
“जब विचार, वाणी और कर्म एकता और सामंजस्य में होते हैं, तब ही जीवन में असली शांति और आनंद आता है।”
उन्होंने बताया कि राजयोग मेडिटेशन से इंसान आत्म जागरूक होता है और अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें सुधार सकता है।
आत्मा के सात मूल गुण
सत्र में यह भी समझाया गया कि हर आत्मा के सात मूलभूत गुण होते हैं – शांति, पवित्रता, प्रेम, शक्ति, ज्ञान और आनंद। यही आत्मा की असली पहचान है। राजयोग ध्यान के अभ्यास से आत्मा फिर से इन गुणों को विकसित कर सकती है और अपने मूल स्वरूप की ओर लौट सकती है। Royal Family Spiritual Retreat
बीके जयंती दीदी ने कहा कि भारत में कभी स्वर्णिम युग था, जब हर आत्मा दिव्य गुणों से संपन्न थी। लेकिन जन्म-मरण के चक्र में आत्मा की शक्ति कमजोर हो गई। अब समय है कि परमात्मा की शिक्षा से आत्माएं फिर से मजबूत बनें।
कौन-कौन हुए शामिल
इस आध्यात्मिक मिलन में देश के कई नामी राजघरानों के सदस्य शामिल हुए। इनमें जोधपुर से महाराजा गज सिंह और महारानी हेमलता राजे, उदयपुर से महाराजा विश्वराज सिंह बहादुर, अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) से महाराजा और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री व डोंडाइचा शाही परिवार के जयकुमार रावल, बूंदी से महाराव राजा वंशवर्धन सिंह, भरतपुर से महारानी दिव्या सिंह और युवराज अनिरुद्ध सिंह, सिरोही से महाराज देवव्रत सिंह बहादुर, किशनगढ़ से महारानी मीनाक्षी देवी, झालावाड़ से राजा राजेंद्र सिंह राजावत व कुवरानी मरुधर कुंवर, जोधपुर के जालिम-विलास परिवार से कुंवर रानी मीरा देवी और अभिजीत सिंह राठौड़ शामिल रहे। इनके अलावा भी कई शाही परिवारों के सदस्य इस खास आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बने।
माउंट आबू की प्राकृतिक खूबसूरती से मंत्रमुग्ध
शाही परिवारों ने कहा कि माउंट आबू की प्राकृतिक छटा बेहद अद्भुत और शांति देने वाली है। यहां के वातावरण ने उन्हें नई ऊर्जा और सकारात्मकता दी। Royal Family Spiritual Retreat
राजयोग ध्यान और अध्यात्मिक सत्रों के बाद सभी ने अनुभव किया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच आत्म शांति और संतुलन पाने के लिए राजयोग मेडिटेशन बेहद जरूरी है।
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माउंट आबू में आयोजित रॉयल फैमिली स्प्रीचुअल रिट्रीट न सिर्फ शाही परिवारों के लिए बल्कि सभी के लिए यह संदेश देता है कि जीवन में असली शांति और खुशी पाने के लिए आत्म जागृति और ध्यान जरूरी है। ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा दिए गए ये संदेश हर व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। Royal Family Spiritual Retreat