बस्तर, छत्तीसगढ़: ( Martyred in militant attack ) छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में इन दिनों मातम पसरा हुआ है. यहाँ के बालेंगा गांव के ओगायगुड़ापारा में रहने वाला एक परिवार, जो अभी कुछ ही हफ्तों पहले अपने बेटे रंजीत की छुट्टी खत्म होने पर उसे विदा करके आया था, आज उसकी शहादत की खबर सुनकर सदमे में है. मणिपुर में उग्रवादियों के घात लगाकर किए गए हमले में दो जवान शहीद हो गए, और उनमें से एक था बस्तर का जांबाज जवान, रंजीत कुमार कश्यप.
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( Bastar, Chhattisgarh: These days, a pall of grief hangs over the Bastar district of Chhattisgarh. A family living in Ogyagudapara, a village in Balenga, who had bid farewell to their son Ranjit just a few weeks ago as his leave ended, is now in shock after hearing the news of his martyrdom. In a guerrilla-style ambush by militants in Manipur, two soldiers were martyred, and one of them was the brave soldier from Bastar, Ranjit Kumar Kashyap.) ( Martyred in militant attack )
यह खबर सुनते ही मानो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात थी, “उस दिन तो रंजीत हँसता हुआ गया था.” उनके बूढ़े माता-पिता का सहारा छिन गया है, और उनकी तीन छोटी बेटियों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है. घर के बाहर लोगों की भीड़ लगी है, हर कोई इस दुखी परिवार को सांत्वना देने आया है, पर कोई शब्द उनके दर्द को बयाँ नहीं कर पा रहे हैं. ( Martyred in militant attack )
परिवार के साथ बीता वो आखिरी महीना
रंजीत के दोस्त और परिवार के लोग बताते हैं कि वह एक महीने पहले ही छुट्टी पर घर आए थे. एक महीने तक उन्होंने अपने परिवार के साथ, खासकर अपनी तीन प्यारी बेटियों के साथ खूब समय बिताया. बेटियों के लिए वह सिर्फ एक फौजी नहीं, बल्कि उनके सबसे अच्छे दोस्त थे. उनके जाने के बाद घर की खामोशी हर किसी को परेशान कर रही है. ( Martyred in militant attack )
रंजीत बचपन से ही देश की सेवा करना चाहते थे. उनके दोस्तों ने बताया कि उनमें देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी. वह हमेशा से ही फोर्स में शामिल होना चाहते थे और उन्होंने अपना सपना पूरा भी किया. पिछले रविवार को जब वह वापस अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे, तब उन्होंने अपने दोस्तों से कहा था कि अब उनकी रिटायरमेंट में सिर्फ 3 साल बचे हैं. उन्होंने अपने दोस्तों के साथ भविष्य की योजनाएं भी साझा की थीं कि रिटायर होने के बाद वह वापस गांव आएंगे और अपने बूढ़े माता-पिता का सहारा बनेंगे, खेती-बाड़ी करेंगे और सुकून की जिंदगी जिएंगे. किसे पता था कि जिंदगी को लेकर देखे गए उनके वो सपने, उस आखिरी मुलाकात के बाद कभी पूरे नहीं हो पाएंगे. ( Martyred in militant attack )
घात लगाकर किया गया कायरतापूर्ण हमला
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक घटना शुक्रवार की शाम मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में हुई. असम राइफल्स के जवान इंफाल से बिष्णुपुर की ओर जा रहे थे. तभी बिष्णुपुर जिले के नांबोल सबल लाई काई इलाके में घात लगाकर बैठे उग्रवादियों ने उनके काफिले पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी. इस हमले में एक वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया.
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इस कायरतापूर्ण हमले में एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) और एक जवान मौके पर ही शहीद हो गए. वह दूसरा जवान कोई और नहीं, बल्कि हमारा बस्तर का लाल रंजीत कुमार कश्यप था. इस हमले में तीन अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है. अधिकारियों ने बताया है कि घायलों की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन एक की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है. ( Martyred in militant attack )
रंजीत का जाना सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है. उनका बलिदान हमें याद दिलाता रहेगा कि हमारे जवान कितनी मुश्किल परिस्थितियों में देश की सेवा करते हैं. उनका यह सर्वोच्च बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा. ( Martyred in militant attack )