दिल्ली, मथुरा -: (Sanatan hindu Ekta Padyatra) बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन एकता पदयात्रा इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु इस पदयात्रा में शामिल हो रहे हैं। पदयात्रा के छठे दिन का नज़ारा कुछ अलग और प्रेरणादायक था, जब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बागेश्वर महाराज का खुले दिल से स्वागत किया।
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सराय खड़क में हुआ ऐतिहासिक स्वागत
बुधवार सुबह जब पदयात्रा सराय खड़क गांव पहुंची, तो माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक और एकता से भर गया। चारों ओर भगवा झंडे लहरा रहे थे, टेंट और होर्डिंग्स लगे थे, और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग महाराज के दर्शन के लिए उमड़ पड़े।
गांव के सरपंच ईरशाद खान खुद स्वागत के लिए आगे आए और उन्होंने बागेश्वर महाराज को भगवा शॉल ओढ़ाकर और माल्यार्पण कर सम्मानित किया। इस पल ने गांव में उपस्थित हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। हिंदू और मुस्लिम समुदाय एक साथ “जय श्रीराम” और “भारत माता की जय” के नारे लगाते नज़र आए। (Sanatan hindu Ekta Padyatra)
मुस्लिम समाज का अनोखा संदेश
इस मौके पर सरपंच ईरशाद खान ने कहा —
“यह देश हम सबका है। इस मिट्टी से हमें प्यार है और हम सब इसकी एकता के लिए हमेशा तैयार हैं। हाल में जो घटनाएं हुईं, वो बहुत दुखद हैं। हम अपने समाज में बैठकों के ज़रिए युवाओं को सही राह दिखाने का प्रयास करेंगे।”
उन्होंने साफ कहा कि “अगर देश रहेगा तभी हम सब रहेंगे।”
यह बयान सुनकर उपस्थित भीड़ ने ज़ोरदार तालियों से उनका स्वागत किया। (Sanatan hindu Ekta Padyatra)
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महाराज ने कहा – “देश बचेगा तो संविधान बचेगा”
बागेश्वर महाराज ने भी बड़ी विनम्रता से कहा कि उनका उद्देश्य किसी धर्म विशेष को ऊंचा या नीचा दिखाना नहीं है, बल्कि देश में “एकता और संविधान की रक्षा” का संदेश देना है। (Sanatan hindu Ekta Padyatra)
उन्होंने कहा —
“देश बचेगा तो संविधान बचेगा। आप सब अपने बच्चों की परवरिश पर ध्यान दें, उन्हें सच्चाई और देशप्रेम सिखाएं। अगर देश में दंगा होगा, तो सबसे बड़ा नुकसान हमारे समाज का होगा।”
महाराज ने मुस्लिम समुदाय से अनुरोध किया कि वे अपने इलाकों में मौलवियों और शिक्षकों से बातचीत करें ताकि बच्चे सही राह पर रहें।
“डॉ. अब्दुल कलाम को मेरा सैल्यूट” – बागेश्वर महाराज
महाराज ने अपने संबोधन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उल्लेख करते हुए कहा कि वे सच्चे देशभक्त और कर्मयोगी थे। (Sanatan hindu Ekta Padyatra)
उन्होंने कहा —
“मैं अब्दुल कलाम साहब को सैल्यूट करता हूं। रहीम और रसखान जैसे कवियों ने भी अपने जीवन से दिखाया कि इंसानियत किसी मज़हब से बड़ी होती है। यही संदेश हमारी पदयात्रा का है — विविधता में एकता।”
पदयात्रा में दिखी एकता की मिसाल
पदयात्रा के दौरान हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग एक साथ चल रहे थे। कई मुस्लिम युवाओं ने भगवा गमछा ओढ़कर महाराज के साथ फोटो खिंचवाई। (Sanatan hindu Ekta Padyatra)
गांव के सानू, सलमान, साहिल और फहीम जैसे कई मुस्लिम युवाओं ने व्यवस्था संभालने में भी सक्रिय भाग लिया।
उनका कहना था —
“हम सब इंसान हैं, मज़हब से पहले देश आता है। बागेश्वर महाराज का संदेश दिल को छू लेने वाला है।”
देशभर में फैल रहा एकता का संदेश
यह दृश्य सिर्फ सराय खड़क तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर जब यह वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं, तो लोगों ने इसे “हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल” बताया। (Sanatan hindu Ekta Padyatra)
कई यूज़र्स ने लिखा कि अगर हर जगह ऐसा माहौल बने तो नफरत की दीवारें खुद ही गिर जाएंगी। वहीं, कई सामाजिक संगठनों ने इस स्वागत को “भारत की असली ताकत” बताया।
पदयात्रा का उद्देश्य – राष्ट्र और संविधान की रक्षा
बागेश्वर धाम की इस सनातन एकता पदयात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है।
महाराज का कहना है कि यह यात्रा भारत की एकता, अखंडता और संविधान की गरिमा की रक्षा के लिए निकाली गई है।
उनका मानना है कि –
“जब तक हम सब मिलकर नहीं चलेंगे, तब तक देश मज़बूत नहीं हो सकता। सनातन धर्म का मतलब सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और एकता है।” (Sanatan hindu Ekta Padyatra)
अंत में महाराज का संदेश
कार्यक्रम के अंत में महाराज ने कहा —
“मेरा संदेश सरल है — देश से बढ़कर कुछ नहीं। हमें अपने धर्म का पालन करना चाहिए, लेकिन दूसरे धर्म का सम्मान भी उतना ही ज़रूरी है। विविधता हमारी ताकत है, इसे कभी कमज़ोरी मत समझिए।” (Sanatan hindu Ekta Padyatra)
भीड़ में मौजूद मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदाय के लोग यह सुनकर भावुक हो उठे। सबने एक स्वर में कहा –
“भारत माता की जय, वंदे मातरम्!” (Sanatan hindu Ekta Padyatra)
बागेश्वर धाम की यह पदयात्रा अब सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं रही, बल्कि देश की एकता का प्रतीक बन चुकी है। सराय खड़क में हुआ यह स्वागत आने वाले समय के लिए एक बड़ा संदेश देता है कि जब दिलों में सम्मान और विश्वास होता है, तो किसी मज़हब की दीवार मायने नहीं रखती। (Sanatan hindu Ekta Padyatra)
यह देश सबका है, और उसकी एकता ही सबसे बड़ा धर्म है।