देवरी क्षेत्र से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत रिछावर के प्राचीन शिव मंदिर में श्रावण मास से शुरू हुआ अखंड रामायण पाठ लगातार जारी है। इस धार्मिक आयोजन को अब दो महीने से अधिक हो चुके हैं और अब तक करीब 29 पाठ पूरे हो चुके हैं। गांव के लोगों का कहना है कि जब तक श्रद्धालुओं की इच्छा बनी रहेगी, यह पाठ निरंतर चलता रहेगा।
युवाओं की बढ़ रही भागीदारी
गांव के बुजुर्गों का मानना है कि इस आयोजन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें गांव के युवा भी सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। आज जहां नई पीढ़ी धीरे-धीरे धर्म और परंपराओं से दूर होती जा रही है, वहीं रिछावर में इसका उल्टा देखने को मिल रहा है। यहां युवा अपने व्यस्त समय से एक-दो घंटे निकालकर रामायण पढ़ने आते हैं और आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं। इससे उनमें धर्म और संस्कृति के प्रति लगाव बढ़ रहा है।
प्राचीन शिव मंदिर की ऐतिहासिक मान्यता
यह अखंड रामायण पाठ गांव के प्राचीन शिव मंदिर में हो रहा है, जिसकी मान्यता काफी पुरानी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं जामवंत जी के हाथों हुई थी। कुछ वर्ष पहले पुरातत्व विभाग ने यहां खजाने की खोज में खुदाई भी की थी, लेकिन कुछ विशेष नहीं मिला। अफसोस की बात यह रही कि खुदाई के बाद मंदिर को अस्त-व्यस्त छोड़ दिया गया और आज तक इसकी व्यवस्थित देखरेख नहीं हो पाई है।
मंदिर परिसर में आज भी पुरानी मूर्तियां और अवशेष रखे हुए हैं, जो इसकी प्राचीनता का प्रमाण देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस बारे में कई बार वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी गई, लेकिन अभी तक मंदिर का संरक्षण नहीं किया गया।
ग्रामीणों की राय
गांव के युवा मनीष लोधी का कहना है कि रिछावर के लोग हर धार्मिक कार्यक्रम में उत्साह से हिस्सा लेते हैं और यह अखंड रामायण पाठ भी उसी परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर हमारी आस्था का केंद्र है और यहां रखी प्राचीन मूर्तियां हमारे गौरवशाली इतिहास को दर्शाती हैं।
वहीं, गांव के रोजगार सहायक प्रदीप लोधी ने बताया कि इस तरह का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है। इस बार तो लगभग 40 से 45 दिन लगातार रामायण पाठ हो रहा है और अच्छी बात यह है कि इसमें गांव के युवा भी स्वेच्छा से शामिल हो रहे हैं।
आस्था और परंपरा का संगम
रिछावर गांव का यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह समाज में एकता और सामूहिकता का भी संदेश देता है। यहां हर कोई, चाहे बुजुर्ग हों या युवा, अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भागीदारी निभाता है।
गांव के लोग मानते हैं कि ऐसे आयोजनों से न केवल धर्म के प्रति लगाव बढ़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपने संस्कार और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। यही कारण है कि रिछावर गांव आज आसपास के क्षेत्र में अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।