रायसेन, 22 अगस्त 2025 – सड़कों पर आवारा घूम रहे और बैठे गौवंश की वजह से हो रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रायसेन के कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और एमपीआरडीसी (MPRDC) के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सड़कों पर मौजूद सभी निराश्रित गौवंश को पास की गौशालाओं में पहुंचाया जाए।
(Raisen Collector Arun Kumar Vishwakarma has taken a big step to prevent accidents caused by stray cattle roaming and sitting on the roads.He has given strict instructions to the National Highway (NH) and MPRDC officials to send all the stray cattle on the roads to nearby cow shelters.)
(Raisen Collector Arun Kumar Vishwakarma has given strict instructions to NH and MPRDC to prevent accidents on the roads. Now the cattle roaming on the roads will be sent to cow shelters. Cat eyes and warning boards will also be installed to increase security at black spots.)
यह फैसला जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की एक अहम बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता खुद कलेक्टर विश्वकर्मा ने की। बैठक में पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार पांडे भी मौजूद थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करना था।
क्यों उठाया गया यह कदम?
दरअसल, रायसेन जिले में कई जगहों पर सड़कों पर गौवंश के बैठे होने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। ये जानवर खासकर रात के समय दिखाई नहीं देते, जिससे तेज रफ्तार गाड़ियों के ड्राइवर इन्हें देख नहीं पाते और दुर्घटनाएं हो जाती हैं। इन हादसों में न सिर्फ इंसानों की जान को खतरा होता है, बल्कि गौवंश भी घायल होते हैं या उनकी मौत हो जाती है।
कलेक्टर विश्वकर्मा ने इस गंभीर समस्या पर एनएच के अधिकारियों को फटकार लगाई और उनसे कहा कि इस मामले को गंभीरता से लें। उन्होंने साफ-साफ कहा कि केवल योजना बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसे तुरंत लागू करने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों को गौवंश को गौशालाओं में पहुंचाने के लिए उचित व्यवस्था करने और इस काम की लगातार निगरानी (मॉनिटरिंग) करने के निर्देश दिए।
ब्लैक स्पॉट्स पर भी होगा काम
बैठक में सिर्फ गौवंश की समस्या पर ही बात नहीं हुई, बल्कि उन जगहों पर भी ध्यान दिया गया जहां सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं। इन जगहों को ब्लैक स्पॉट्स कहा जाता है। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने पठारी गांव के पास की पुलिया और लाम्बाखेड़ा-सलामतपुर मार्ग जैसे कई ब्लैक स्पॉट्स को चिन्हित किया।
अधिकारियों को इन जगहों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई उपाय करने के निर्देश दिए गए, जिनमें शामिल हैं:
कैट आई (Cat’s Eye) लगाना: ये छोटे-छोटे रिफ्लेक्टर होते हैं जो रात में गाड़ी की रोशनी पड़ने पर चमकते हैं, जिससे ड्राइवर को सड़क का किनारा साफ दिखाई देता है।
चेतावनी बोर्ड (Warning Boards) लगाना: इन बोर्डों पर आगे आने वाले खतरे (जैसे कि तीखा मोड़, पुलिया या दुर्घटना संभावित क्षेत्र) की चेतावनी लिखी होती है।
सड़क पर मार्किंग (Road Marking) करना: सड़क पर सफेद या पीली पट्टियां बनाना, जिससे लेन और किनारों का पता चले।
एनएच और एमपीआरडीसी के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वे अगले 10 दिनों में कैट आई और चेतावनी बोर्ड लगा देंगे, और अगले 15 दिनों में सड़क पर मार्किंग का काम भी पूरा कर लिया जाएगा।
जागरूकता अभियान भी जरूरी
कलेक्टर ने सिर्फ सड़कों को सुरक्षित बनाने पर ही जोर नहीं दिया, बल्कि लोगों को भी जागरूक करने की बात कही। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि लोगों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और शराब पीकर गाड़ी न चलाने जैसे नियमों के बारे में कैसे जागरूक किया जाए।
इस बैठक में सहायक कलेक्टर कुलदीप पटेल, एएसपी कमलेश कुमार और अन्य विभागों के अधिकारी और समिति के सदस्य भी मौजूद थे। यह दर्शाता है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले रहा है और सभी विभागों के साथ मिलकर काम कर रहा है।