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रिश्ता तय होने से नाराज थी अर्चना तिवारी, पढ़ाई करना चाहती थी इसलिए रची गुमशुदगी की साजिश – रेल SP राहुल लोढ़ा का बड़ा खुलासा Archana Tiwari was upset with the relationship being fixed

अर्चना तिवारी गुमशुदगी केस का सच सामने आ गया है। रेल SP राहुल लोढ़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि अर्चना शादी नहीं करना चाहती थी और पढ़ाई जारी रखना चाहती थी। घरवालों के दबाव से परेशान होकर उसने गुमशुदगी का नाटक रचा और नेपाल तक पहुंच गई। पुलिस ने जांच कर उसे बरामद किया। पढ़ें पूरा मामला विस्तार से।

On: August 20, 2025 2:37 PM
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भोपाल। पूरे मध्यप्रदेश में सुर्खियों में रही अर्चना तिवारी की गुमशुदगी का राज आखिरकार खुल गया है। जीआरपी (GRP) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे मामले की सच्चाई सामने रखी। रेल एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने बताया कि अर्चना तिवारी असल में कहीं गुम नहीं हुई थी, बल्कि उसने खुद अपनी गुमशुदगी की कहानी रची थी। वजह थी – घरवालों द्वारा जबरन शादी का दबाव और उसकी पढ़ाई जारी रखने की जिद।

(The mystery of Archana Tiwari’s disappearance, which was in the news all over Madhya Pradesh, has finally been solved. GRP held a press conference and revealed the truth of this entire case. Railway SP Rahul Kumar Lodha said that Archana Tiwari had not actually gone missing, but she had fabricated the story of her disappearance herself. The reason was – the pressure of forced marriage by the family members and her insistence on continuing her studies.)

लगातार आ रहे थे शादी के रिश्ते, लेकिन अर्चना चाहती थी पढ़ाई

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेल SP राहुल लोढ़ा ने बड़ा खुलासा किया कि अर्चना के घरवालों परंपरागत तरीके से उसके लिए रिश्ते ढूंढ रहे थे। यहां तक कि एक पटवारी से उसका रिश्ता भी तय कर दिया गया था। लेकिन अर्चना इस शादी को लेकर बिल्कुल तैयार नहीं थी। वह पढ़ाई को ही प्राथमिकता देना चाहती थी।

इसी दौरान शुजालपुर के रहने वाले सारांश से अर्चना की दोस्ती हो गई। दोनों की मुलाकात इंदौर में हुई थी और दोनों अक्सर बात किया करते थे। यही दोस्ती आगे चलकर इस पूरे मामले की वजह बनी।

शादी का दबाव और ‘भागने’ की प्लानिंग

रेल SP के मुताबिक, जब अर्चना के घरवालों ने पढ़ाई छोड़कर शादी के लिए दबाव डालना शुरू किया तो वह परेशान हो गई। अर्चना ने अपने दोस्त सारांश से इस बारे में चर्चा की। दोनों ने हरदा के एक ढाबे पर मुलाकात की और भागने की प्लानिंग बनाई।

हालांकि बाद में उन्हें लगा कि भागने से परिवार और पुलिस का शक बढ़ जाएगा। इसलिए अर्चना ने गुमशुदगी की कहानी रचने का मन बनाया। उसका सोचना था कि GRP शायद इस मामले को उतनी गंभीरता से नहीं लेगी। लेकिन हुआ उल्टा – मामला मीडिया में छा गया और पुलिस ने हर एंगल से जांच शुरू कर दी।

अपहरण जैसी स्क्रिप्ट रची गई

जांच में सामने आया कि अर्चना ने अपने दोस्त सारांश और एक तीसरे शख्स तेजन्दर की मदद से पूरी ‘गुमशुदगी’ की स्क्रिप्ट लिखी।

तेजन्दर ने इटारसी स्टेशन के आउटर का वह रास्ता बताया, जहां CCTV कैमरे नहीं थे।

ट्रेन में यात्रा के दौरान नर्मदापुरम में तेजन्दर ने अर्चना को कपड़े दिए। इसके बाद अर्चना ने B3 कोच से A2 कोच बदलकर आउटर से ट्रेन छोड़ दी।

योजना के तहत अर्चना ने मोबाइल फोन भी तेजन्दर को दे दिया और कहा कि उसे जंगल में फेंक दे, ताकि लोकेशन ट्रेस न हो पाए।

इस तरह उसने सबको ये यकीन दिलाने की कोशिश की कि वह अचानक गायब हो गई है या उसके साथ कोई हादसा हुआ है।

नेपाल पहुंच गई थी अर्चना

रेल SP ने बताया कि अर्चना और सारांश ने शुरू में यही सोचा था कि वे सिर्फ मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों में छिपकर रहेंगे। लेकिन जब मीडिया और सोशल मीडिया पर मामला तूल पकड़ गया, तब दोनों ने राज्य छोड़कर बाहर जाने का प्लान बनाया।

दोनों पहले हैदराबाद गए, फिर दिल्ली होते हुए जोधपुर पहुंचे और वहां से बस के जरिए नेपाल की राजधानी काठमांडू चले गए। अर्चना वहीं छिपी रही।

पुलिस के लिए चुनौती बना मामला

पुलिस को सबसे ज्यादा मुश्किल इस वजह से आई क्योंकि अर्चना और सारांश व्हाट्सएप कॉल पर बात करते थे। ऐसे में CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) नहीं मिल पा रही थी। वहीं, अर्चना ने ट्रेन में अपना सामान जानबूझकर छोड़ दिया था ताकि लगे कि वह कहीं गिर गई है।

लेकिन जब पुलिस ने सारांश को पकड़ा और उससे पूछताछ की, तब परत-दर-परत पूरा सच सामने आ गया।

इस तरह हुई बरामदगी

रेल SP ने बताया कि सारांश नेपाल से वापस आ गया था। लेकिन उसने चालाकी दिखाते हुए अपना मोबाइल इंदौर में छोड़ दिया ताकि लोकेशन से उसका पता न चल सके। पुलिस ने जब उसे राउंडअप किया तो उसने पूरा राज खोल दिया। इसके बाद अर्चना को नेपाल बॉर्डर से पकड़कर दिल्ली लाया गया और फिर फ्लाइट से भोपाल लाया गया।

प्रेस नोट
दिनांक: 20-08-2025
जीआरपी रानी कमलापति की गुमशुदा महिला अर्चना तिवारी को जीआरपी भोपाल ने नेपाल बॉर्डर लखीमपुर खीरी (उ.प्र.) से किया दस्तयाब
कार्य का विवरण: रेलवे इकाई भोपाल में पंजीबद्ध गुम इंसान महिला अर्चना तिवारी के मामले में राहुल कुमार लोढ़ा, पुलिस अधीक्षक रेलवे भोपाल के कुशल मार्गदर्शन एवं श्री श्रीमती नीतू ढाबर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रेलवे भोपाल एवं रामसनेह चौहान उप पुलिस अधीक्षक रेलवे भोपाल द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में निरीक्षक नहीर खान, निरीक्षक बबीता कटोरिया, निरीक्षक संजय चौकसे एवं उप निरीक्षक महेन्द्र सिंह सोमवंशी के कुशल नेतृत्व में टीम गठित कर थाना जीआरपी रानी कमलापति के गुम इंसान क्रमांक 05 की बड़ी सफलता प्राप्त की गई है। घटना का विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 07/08/2025 को ट्रेन 18233 नर्मदा एक्सप्रेस कोच एस-3 बर्थ नंबर 03 पर अर्चना तिवारी पिता स्वर्गीय नारायण तिवारी उम्र 29 वर्ष निवासी मौलाना नगर थाना रंगनाथ जिला कटनी (म.प्र.) पर अपने घर जाने की यात्रा कर रही थी, जो अपने घर नहीं पहुंचने पर उसके भाई अंकुश तिवारी द्वारा दिनांक 08.08.2025 को स्वयं थाना जीआरपी कटनी में आकर अपनी बहन अर्चना तिवारी का गुम होने सूचना दी जिस पर जीआरपी थाना कटनी द्वारा शून्य पर गुम इंसान की कायमी कर घटना स्थल स्टेशन रानी कमलापति का होने से जीआरपी थाना कटनी से डायरी प्राप्त होने पर थाना जीआरपी रानी कमलापति में असल गुम इंसान क्रमांक 5/25 दिनांक 09.08.2025 का कायम कर जांच में लिया गया। गुम महिला अर्चना तिवारी हाई कोर्ट में एडवोकेट एवं सिविल जज तैयारी इंदौर में रहकर कर रही थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 18233 के रिजर्वेशन चार्ट एवं संबंधित स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों के रिजर्वेशन चार्टों को प्राप्त कर जाँच की गई, तथा उक्त कोच में गुम महिला के आस-पास के यात्रियों के घर जाकर पूछताछ की गई, तथा साथ ही साधनों से सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त की व रेलवे स्टेशन इंदौर, भोपाल, सीहोर, रानी कमलापति, नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया, करेली, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, बिलासपुर तक व शहरों में लगे लगभग 2 हजार सीसीटीवी फुटेजों को खंगाले गए।
नदी नदी में लगभग 32 किलोमीटर तक एसआरएफ एवं जीआरपी द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया व रानी कमलापति से जबलपुर तक अलग-अलग टीम बनाकर पैदल सर्च कराई गई एवं बरखेड़ा से बुधनी तक वन विभाग के साथ जीआरपी की टीमों के साथ जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, बाद इलेक्ट्रोनिक संसाधनों के माध्यम से संदेह के नंबर की जानकारी प्राप्त की गई, जिस पर से इंदौर एवं शुजालपुर में संदेह की पहचान चारुसिंह जोकचंद्र के रूप में की जाकर पूछताछ की गई, पूछताछ में गुम महिला अर्चना तिवारी से सम्पर्क कर नेपाल बॉर्डर धनगढ़ी जिला लखीमपुर खीरी उ.प्र. से बरामद करने में सफलता हासिल की गई।


पूछताछ में अर्चना तिवारी ने बताया की मेरे घर वाले मेरी मर्जी के खिलाफ मेरी लिए शादी के रिश्ते देख रहे थे कुछ दिन पहले मेरे घर वालों द्वारा बताया गया की तुम्हारे रिश्ते के लिए पटवारी लड़का देखा है और इसी प्रकार बार-बार शादी करने के लिए मजबूर कर रहे थे जिस कारण से मैं मानसिक रूप से परेशान हो गई थी। दिनांक 07.08.2025 को मैं इंदौर से कटनी के लिए 18233 नर्मदा एक्सप्रेस से रवाना हुई मैं मानसिक रूप से घर जाने के लिए तैयार नहीं थी रक्षाबंधन के कारण मैं घर जाने के लिए रवाना हो गई परंतु मेरा मन सोच लिया की अब मैं घर नहीं जाऊंगी और न ही शादी करूंगी जब तक मैं सिविल जज नहीं बन जाती फिर मैंने सोचते सोचते रेलवे स्टेशन इटारसी पहुंचने से पहले अपने पुराने क्लाइंट तेजेंद्र सिंह जो पंजाब का रहने वाला है वर्तमान में इटारसी में रहता है उससे मदद मांगी की मुझे इटारसी उतरकर वापस इंदौर जाना है, फिर मैंने अपने दोस्त सारांश को भी फ़ोन लगा इटारसी बुलाया लिया था, मैंने इटारसी उतरने से पूर्व ही तेजेंद्र को बताया दिया था कि जहाँ इटारसी स्टेशन पर कैमरे न लगे हों वहां उतार लेना, फिर तेजेंद्र नर्मदापुरम स्टेशन से मेरे साथ हो गया, तेजेंद्र ने मुझे इटारसी में मेरे दोस्त सारांश के साथ भेज दिया और तेजेंद्र इटारसी में रुक गया था फिर मैं सारांश के साथ उसकी कार में बैठकर शुजालपुर आ गई थी, शुजालपुर से इंदौर निकल गई थी इंदौर में घर वालों के आ जाने के डर के कारण मैं हैदराबाद चली गई, हैदराबाद में 2-3 दिन रुकने के उपरांत पेपर एवं मीडिया रिपोर्ट से मुझे यह जानकारी मिली गई थी मेरा केस काफी चर्चित हो गया कारण सुरक्षित महसूस नहीं कर रही थी। मैं सारांश के साथ दिनांक 11.08.2025 को हैदराबाद से दिल्ली पहुंच गई और दिल्ली से टैक्सी से सारांश के साथ धनगढ़ी नेपाल पहुंच गई फिर धनगढ़ी से काठमांडू पहुंच गई जहां सारांश ने अपने परिचित वापिस देवीबहादुर का बात कराकर किसी होटल में रुकवाया और सारांश वापस इंदौर चला गया। कुछ दिन बाद देवकोटा ने मुझे एक नेपाल की सिम दिलवा दी थी, जिससे मैं वाटसअप से सारांश से बात करती रही। सारांश और तेजेंद्र ने दोस्त होने के कारण मेरी मदद की थी जिससे मैं नेपाल तक पहुंच गई थी किसी भी व्यक्ति द्वारा मेरे साथ कोई गलत हरकत की गई ना ही गलत काम किया गया था, सारांश के माध्यम से पुलिस से मुझे संपर्क किया गया कि आपके पर परिवार वाले बहुत परेशान है वापस आ जाओ बाद मैं काठमांडू से प्लेन से धनगढ़ी आई बाद थाना जीआरपी व नेपाल बार्डर लखीमपुरखीरी पहुंची जहां मैं मध्यप्रदेश जीआरपी पुलिस भोपाल की टीम मिले जिनके साथ मैं जीआरपी रानी कमलापति आ गई।


सराहनीय भूमिका: उपपुस (रेलवे) रामसनेह चौहान निरीक्षक नजीर खान, निरीक्षक संजय चौकसे, निरीक्षक प्रकाश सेन, निरीक्षक बबीता कटोरिया, उप निरी. एम एस सोमवंशी, सउनि विजय तिवारी, सउनि आर डी टेकाम, सउनि प्रहलाद यादव, सउनि बृजेश, अनंतरम कुशवाह, प्रआर 669 मनोज सिंह कुशवाह, प्रआर 13 राम अनुकूल, प्रआर 112 अनिल सिंह, प्रआर 599 अजय प्रताप सिंह, प्रआर 313 अमित तिवारी, प्रआर 633 रविपंदन प्रजापति, प्र.आर 05 संतोष शुक्ला, आर. 293 दीपक, आर. 207 सुनील किआर, आर. 31 अनिल कुमार, आर. दीपक अहिरवार, आर 590 संदीप मीणा, आर. 437 राजपाल जाटव, आर. 198 अखिलेश चौहान, आर. 134 नवीनकिशोर पराशर आर 437 राजपाल जाधव, 602 ब्रजेश, आर. 01 राहुल शर्मा, आर. 02 लक्ष्मी सोमवंशी, प्रआर 495 अमित सक्सेना (सायबर सेल) की सराहनीय भूमिका रही।

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