मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी में संगठनात्मक फेरबदल का असर अब ज़िलों तक साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हाल ही में अपनी नई टीम का ऐलान किया, जिसमें रायसेन जिले की कमान एक बार फिर से सिलवानी-बेगमगंज से विधायक देवेंद्र पटेल को सौंपी गई। लेकिन नए जिला अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद रायसेन जिले की कांग्रेस राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बरेली क्षेत्र के कई मंडल और ब्लॉक अध्यक्षों ने इस्तीफे सौंप दिए हैं।
इस्तीफों की झड़ी शुरू
नए जिला अध्यक्ष की नियुक्ति से असहमति जताते हुए कांग्रेस पदाधिकारियों ने त्यागपत्र देकर अपनी नाराज़गी जताई।
रासबिहारी रघुवंशी (मंडलम कांग्रेस कमेटी, ऊटिया कलां बरेली)
राजेश उपाध्याय (अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बरेली)
गोधन सिंह राजपूत (अध्यक्ष, मंडलम कांग्रेस कमेटी , बरेली)
इन तीनों नेताओं ने अपने-अपने त्यागपत्र पत्र में लिखा कि जिला अध्यक्ष का चयन लोकतांत्रिक और सर्वसम्मति से नहीं हुआ। “संगठित सुझाव” के सिद्धांत की अनदेखी से उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना है कि वे हमेशा कांग्रेस की विचारधारा और संगठन की मजबूती के लिए निष्ठा और ईमानदारी से काम करते रहे, लेकिन वर्तमान हालात में उनकी सेवाओं का सही सम्मान नहीं हो पा रहा है।
पार्टी में असंतोष
त्यागपत्र में साफ कहा गया है कि जिला अध्यक्ष चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं की राय को महत्व नहीं दिया गया। इस कारण स्थानीय स्तर पर असंतोष की स्थिति बन गई है। कांग्रेस पदाधिकारियों ने न केवल पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया बल्कि अपने संगठनात्मक पदों से भी त्यागपत्र सौंप दिए।
राजनीतिक असर
देवेंद्र पटेल लंबे समय से कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में हैं और फिलहाल विधायक भी हैं। उन्हें एक बार फिर जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद पार्टी उम्मीद कर रही थी कि संगठन मजबूत होगा। लेकिन स्थानीय नेताओं के इस्तीफों ने कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों को और जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में कांग्रेस की जमीनी राजनीति को प्रभावित कर सकता है, खासकर रायसेन जिले में जहां कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर रहती है।
आगे का रास्ता
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और जिला स्तर के वरिष्ठ नेता इन इस्तीफों को लेकर क्या कदम उठाते हैं। क्या इस्तीफे स्वीकार होंगे या फिर नाराज़ नेताओं को मनाने की कोशिश होगी? यह आने वाला समय बताएगा।