रायसेन। भारत की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की जयंती इस वर्ष भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। रायसेन जिले के ग्राम थालादिघावन में स्थित रानी अवंती चौक पर ग्रामीणों और युवाओं ने मिलकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, दीप प्रज्वलित किया और तिलक अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
ग्रामीणों ने किया श्रद्धांजलि अर्पित
जयंती समारोह में गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने एक साथ भाग लिया। इस दौरान रानी अवंती बाई की मूर्ति के सामने फूल-मालाएं अर्पित की गईं। ग्रामीणों ने कहा कि रानी अवंती बाई का जीवन संघर्ष और बलिदान से भरा हुआ था। वह केवल रायसेन या रेवांचल की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की शान थीं।
स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना
इतिहास गवाह है कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में जब अंग्रेजों ने देश की जनता को दमनकारी नीतियों से दबाना चाहा, तब रामगढ़ की रानी अवंती बाई ने विद्रोह की चिंगारी जगाई। उन्होंने अपने सैनिकों के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला और क्रांति की धारा को और भी प्रबल बना दिया।
रानी अवंती बाई भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की पहली महिला शहीद वीरांगना मानी जाती हैं। उनका साहस और त्याग आज भी देश के हर नागरिक को प्रेरित करता है।
प्रेरणा बनीं रानी अवंती बाई
गांव में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि रानी अवंती बाई जैसी वीरांगनाओं की कहानियां सिर्फ इतिहास तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज और देश के निर्माण में युवाओं को उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम में मौजूद बुजुर्गों ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को उनके पदचिह्नों पर चलते हुए देश और समाज की सेवा करनी चाहिए।
हर साल धूमधाम से होती है जयंती
गौरतलब है कि रानी अवंती बाई लोधी की जयंती हर साल 16 अगस्त को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस अवसर पर देशभर में उनके बलिदान और योगदान को याद किया जाता है। ग्राम थालादिघावन में आयोजित कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि रानी अवंती बाई की गाथा अमर है और उनकी शौर्यगाथा हमेशा लोगों को देशभक्ति की राह दिखाती रहेगी।