बस्तर। कभी नक्सल गतिविधियों से कांपने वाला इलाका, आज देशभक्ति के रंग में रंगा नज़र आया। 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सीआरपीएफ की 188वीं बटालियन ने बस्तर के सुदूरवर्ती और कभी नक्सल प्रभावित रहे महिमा गांव के बालक आश्रम शाला में ध्वजारोहण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस विशेष मौके पर तिरंगा फहराने का गौरव 91 वर्षीय बुजुर्ग रामनाथ कश्यप को दिया गया, जिन्होंने अपने जीवन में नक्सल आतंक का भयावह दौर भी देखा और अब शांति और सुरक्षा का समय भी जी रहे हैं। ( The pride of the tricolour resounded in the old den of Naxalites today, CRPF celebrated Independence Day in Mahima Ashram of Bastar)
नक्सलियों का अड्डा रहा इलाका, अब विकास की नई कहानी
कुछ साल पहले तक महिमा और उसके आसपास का इलाका नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। यहां नक्सली अपना ट्रेनिंग सेंटर और ठिकाना बनाए रखते थे। लेकिन सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की लगातार तैनाती ने हालात बदल दिए। अब यहां शांति, सुरक्षा और विकास की नई बयार बह रही है। गांव के लोग खुलकर राष्ट्रीय पर्व मना रहे हैं, जो पहले नक्सली डर के साये में संभव नहीं था।
रामनाथ कश्यप ने फहराया तिरंगा
स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान 188वीं बटालियन के कमांडेंट भवेश चौधरी के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में 91 वर्षीय रामनाथ कश्यप ने तिरंगा फहराया। उनके चेहरे की मुस्कान और गर्व यह बयां कर रहा था कि अब इस इलाके में अमन-चैन कायम है। उन्होंने कहा कि यह पल उनके जीवन का सबसे सुखद और गर्व का क्षण है।
देशभक्ति और जागरूकता फैलाने का अभियान
सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट बन्ना राम ने कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों, बच्चों और महिलाओं को संबोधित करते हुए तिरंगे के महत्व, भारतीय संविधान की गरिमा और एक अच्छे नागरिक के कर्तव्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य न सिर्फ राष्ट्रीय पर्व मनाना है, बल्कि हर नागरिक के दिल में देशभक्ति और सुरक्षा की भावना जगाना भी है।
गांव-गांव से पहुंचे लोग
कार्यक्रम में बन्ना राम (सहायक कमांडेंट), निरीक्षक प्रवीण कुमार, एफ/188 बटालियन के अधिकारी और जवान, बालक आश्रम के अधीक्षक गोवर्धन पेगेड, भुवनेश्वर सिन्हा, कमल कश्यप, हरिश बघेल, ग्राम पंचायत पालम की सरपंच फूलमती कश्यप सहित पालम, पुसपाल, महिमा और आसपास के गांवों से सैकड़ों ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे मौजूद थे।
मिठाई और बिस्कुट से बच्चों में खुशी
ध्वजारोहण के बाद कार्यक्रम का समापन बच्चों और ग्रामीणों में मिठाई और बिस्कुट वितरण के साथ हुआ। बच्चों ने भी इस मौके पर देशभक्ति के गीत गाए और माहौल को जोश और उत्साह से भर दिया।
सीआरपीएफ का संकल्प
सीआरपीएफ का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम न सिर्फ लोगों के मन में देश के प्रति सम्मान बढ़ाते हैं, बल्कि नक्सल प्रभावित इलाकों में विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। जवानों का मानना है कि जब ग्रामीण राष्ट्रीय पर्व को खुलकर मनाने लगते हैं, तो यह संकेत है कि इलाके में शांति और विकास की जड़ें मजबूत हो रही हैं।