सिलवानी। रक्षाबंधन का त्योहार सिर्फ भाइयों और बहनों के बीच ही नहीं, बल्कि समाज में सुरक्षा और सम्मान के रिश्तों को भी मजबूत करता है। इसी सोच के साथ बुधवार को द संस्कार वैली स्कूल की कक्षा 6, 7 और 8 की छात्राएं अपने शिक्षकों के साथ सिलवानी कोतवाली थाने पहुंचीं और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को राखी बांधकर अपना स्नेह व आभार प्रकट किया।
थाने पहुंचते ही छात्राओं का स्वागत पुलिस स्टाफ ने गर्मजोशी से किया। सबसे पहले उन्हें थाना परिसर का भ्रमण कराया गया, जहां पुलिसकर्मियों ने विभिन्न सेक्शन, रिकार्ड रूम और कार्यप्रणाली की विस्तार से जानकारी दी। छात्राएं भी इस दौरान बेहद उत्साहित नजर आईं और पुलिस की जिम्मेदारियों व कामकाज को करीब से समझा।
इसके बाद राखी समारोह की शुरुआत हुई। छात्राओं ने थाना प्रभारी पूनम सविता को तिलक कर रक्षासूत्र बांधा और मिठाई खिलाई। इसी तरह वहां मौजूद महिला पुलिसकर्मियों और आरक्षकों को भी राखी बांधकर सम्मानित किया गया। इस दौरान माहौल बेहद भावुक और खुशियों से भरा रहा।
एक छात्रा ने बताया, “हम आज उन पुलिसकर्मियों को राखी बांधने आए हैं, जो दिन-रात हमारी सुरक्षा करते हैं, अपराधियों को सजा दिलाते हैं और हमें सुरक्षित माहौल में पढ़ाई-लिखाई करने का अवसर देते हैं।”
पुलिसकर्मियों ने भी इस स्नेह और सम्मान से भरे आयोजन पर खुशी जताई। थाना प्रभारी पूनम सविता ने कहा, “पुलिस और जनता का रिश्ता आपसी विश्वास और सहयोग पर टिका होता है। आज छात्राओं ने जो प्यार और सम्मान दिया, वह हमारे लिए प्रेरणा है।” उन्होंने साथ ही छात्राओं को सुरक्षा संबंधी सुझाव भी दिए और सतर्क रहने के तरीके बताए।
इस मौके पर पुलिसकर्मियों ने भी छात्राओं को उपहार भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता सिर्फ एक त्योहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साल भर सहयोग और विश्वास की डोर को मजबूत करेगा।
रक्षाबंधन जैसे त्योहार जहां भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करते हैं, वहीं इस तरह के आयोजन पुलिस और नागरिकों के बीच आपसी समझ, सम्मान और भरोसे को भी गहरा करते हैं। इस पहल से छात्राओं को न सिर्फ सुरक्षा बलों के कामकाज की जानकारी मिली, बल्कि उनके मन में पुलिस के प्रति सम्मान और अपनापन भी बढ़ा।
थाने का यह अनोखा रक्षाबंधन समारोह इस बात का प्रमाण है कि समाज में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले हमारे पुलिसकर्मी भी हमारे परिवार का हिस्सा हैं, और त्योहार हमें यह याद दिलाते हैं कि सम्मान और स्नेह की डोर किसी सीमा में बंधी नहीं होती।