सिलवानी (रायसेन) – “देश की आर्थिक आधारशिला को मजबूती देने में वैश्य समाज का योगदान सबसे अधिक है।”
यह बात वैश्य महासम्मेलन के प्रदेशाध्यक्ष सुधीर अग्रवाल ने सिलवानी में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में कही। रायसेन जिला इकाई द्वारा आयोजित यह बैठक रॉयल गार्डन में हुई, जिसमें प्रदेशाध्यक्ष के साथ संभागीय अध्यक्ष पीके जैन, प्रदेश महामंत्री इंजीनियर वीके गुप्ता और जिलाध्यक्ष संजू बनारसी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और समाज के गणमान्य सदस्य शामिल हुए।
बैठक में संगठन के विस्तार, सामाजिक सरोकार, योजनाओं के क्रियान्वयन और नए नवाचारों पर विस्तार से चर्चा हुई।
संगठन की मजबूती और सामाजिक कार्य
बैठक की शुरुआत में प्रदेशाध्यक्ष सुधीर अग्रवाल ने बताया कि वैश्य महासम्मेलन की संरचना बेहद मजबूत और संगठित है।
आज संगठन के पास 60,000 से अधिक सक्रिय सदस्य, 20 संभाग और 65 जिले हैं, जो व्यवस्थित ढांचे में कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि भोपाल में 25 करोड़ की लागत से भव्य वैश्य भवन और 35 सीटर छात्रावास का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। इसके साथ ही शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और नवाचार के क्षेत्र में भी संगठन ने कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
वैश्य समाज के सामने चुनौतियां
सुधीर अग्रवाल ने समाज के प्रति बनी गलत धारणाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा –
“दुर्भाग्य से कई वर्ग हमें शोषक की नजर से देखते हैं। प्रशासन और पुलिस की नजर में हम ऐसे ‘पके हुए फल’ हैं, जिन पर जितना दबाव डालो, उतना ही रस निकलता है। सरकारी दफ्तरों में ‘बनिया’ शब्द सुनते ही काम के बदले वसूली का दबाव बढ़ जाता है। यहां तक कि हमारे लिए रेट भी अलग हो जाते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दल हमें अपनी गिनती में ही नहीं लेते, क्योंकि उनका मानना है कि चुनाव के दिन हम मतदान के बजाय पिकनिक पर चले जाते हैं।
राष्ट्र निर्माण में वैश्य समाज की भूमिका
प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि वैश्य समाज के लोग प्रतिदिन 17-18 घंटे तक काम करते हैं, जिससे न सिर्फ अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित होता है, बल्कि देश की आर्थिक वृद्धि में भी अहम योगदान देते हैं।
व्यापारी वर्ग रोजगार सृजन से लेकर सरकार को सबसे अधिक कर (टैक्स) देने में अग्रणी है।
उन्होंने जोर देकर कहा –
“जिम्मेदारी, ईमानदारी और कर्तव्य पालन हमारे संस्कारों का हिस्सा है, लेकिन अब समय आ गया है कि हम संगठित होकर आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाएं।”
महिला शक्ति की भूमिका
सुधीर अग्रवाल ने समाज में व्याप्त दहेज प्रथा को एक ‘दानव’ बताते हुए कहा कि यह गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को तोड़ रहा है। उच्च शिक्षा की दौड़ में लड़कियों की शादी की उम्र निकल रही है, और कई युवतियां अन्य समाज में विवाह कर रही हैं।
उन्होंने चिंता जताई कि कभी “हम दो, हमारे दो” का नारा देने वाला समाज अब “हम दो, हमारा एक” की ओर बढ़ रहा है, जिससे वैश्य समाज की संख्या में गिरावट आ रही है।
मातृशक्ति से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा –
“हर परिवार की हर महिला को संगठन से जोड़ना जरूरी है। जब महिलाएं आगे आएंगी, तभी समाज में असली परिवर्तन आएगा। सृष्टि के निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।”
संगठन विस्तार और नई समितियों का गठन
बैठक में जिलाध्यक्ष संजू बनारसी ने जिला समिति और 6 तहसील समितियों के गठन की जानकारी दी।
साथ ही यह निर्णय लिया गया कि आगामी महीनों में तहसील स्तर पर भी इसी तरह की बैठकें कर संगठन की जमीनी पकड़ मजबूत की जाएगी।
सम्मान और आभार
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे प्रदेशाध्यक्ष सुधीर अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री इंजीनियर वीके गुप्ता और संभागीय अध्यक्ष पीके जैन का सम्मान जिलाध्यक्ष संजू बनारसी और महिला इकाई जिलाध्यक्ष रुपाली मुणोत ने स्मृति चिन्ह भेंट कर किया।
इसके अलावा, राजेश जैन खन्ना ने प्रदेशाध्यक्ष को साफा पहनाकर सम्मानित किया, जबकि कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी ओके मस्ताना ने निभाई।
आभार प्रदर्शन तहसील अध्यक्ष सुरेंद्र नेमा ने किया।
कार्यक्रम में जिले और तहसीलों के पदाधिकारी, व्यापारी, महिला प्रतिनिधि और नगर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
मुख्य बातें संक्षेप में
60,000+ सदस्य, 20 संभाग और 65 जिलों में सक्रिय संगठन।
भोपाल में 25 करोड़ की लागत से वैश्य भवन और छात्रावास का निर्माण।
रोजगार सृजन और टैक्स योगदान में अग्रणी वैश्य समाज।
दहेज प्रथा, घटती जनसंख्या और राजनीतिक उपेक्षा पर चिंता।
महिला शक्ति को संगठन से जोड़ने का आह्वान।