सिलवानी। बरसात के मौसम में जहां तालाब और नदियां लबालब होने चाहिए, वहीं सिलवानी के ग्राम सियरमऊ के लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। पिछले एक हफ्ते से गांव में पेयजल वितरण पूरी तरह बंद है। हालात ऐसे हैं कि करीब दो हजार की आबादी वाले इस गांव में लोग पीने के पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कहते हैं—“हमें इस संकट की कोई जानकारी नहीं है।”
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एक सप्ताह से नल सूखे, लोग मजबूरन ट्यूबवेल का सहारा ले रहे
ग्राम सियरमऊ में नल-जल योजना का काम लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ। इस बीच पानी सप्लाई करने वाली मोटर खराब हो गई, जिससे पिछले सात दिनों से एक बूंद पानी भी नहीं मिल पा रहा। परेशान ग्रामीण मजबूर होकर निजी ट्यूबवेल और हैंडपंप का सहारा ले रहे हैं।
गांव की दिनचर्या ठप, स्कूल और मजदूरी पर असर
पानी की किल्लत ने गांव की दिनचर्या पर गहरा असर डाला है।
- बच्चे—पानी भरने के चक्कर में कई स्कूली बच्चे समय पर स्कूल नहीं जा पा रहे।
- मजदूर वर्ग—दिहाड़ी मजदूर पानी के इंतजार में ही दिन गुजार रहे हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।
- महिलाएं—खाली बर्तन लेकर कई किलोमीटर तक पानी की तलाश में भटक रही हैं।
गांव की महिलाएं कहती हैं कि यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि रोज का संघर्ष बन चुका है।
ग्रामीणों की शिकायत, अधिकारी कॉल तक नहीं उठाते
गांव के बसंत ठाकुर, अतुल, राजू ठाकुर, बंटी महाराज, मोहन, कमलेश, भूरा ठाकुर, वंदना, सीमा, द्रोपती और संगीता सहित कई लोगों ने बताया कि उन्होंने ग्राम पंचायत सचिव रमेश शाह और जनपद पंचायत के सीईओ को फोन कर समस्या बताने की कोशिश की, लेकिन दोनों ने कॉल रिसीव नहीं किया।
प्रशासन की चुप्पी पर नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि एक सप्ताह से पानी नहीं मिलने की समस्या पर न तो कोई अधिकारी गांव आया और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
अधिकारियों का बयान: हमें जानकारी नहीं
पीएचई एसडीओ राजेश शर्मा का कहना है—
“ग्राम सियरमऊ में पिछले एक सप्ताह से पेयजल वितरण नहीं हुआ, इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है।”
यह बयान सुनकर ग्रामीण और भी आक्रोशित हैं, क्योंकि उनके अनुसार यह समस्या कई बार उठाई जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक कुछ नहीं हुआ।
गांव में पानी संकट का बढ़ता खतरा
बरसात के दिनों में पानी की किल्लत होना इस बात का संकेत है कि स्थिति आने वाले दिनों में और बिगड़ सकती है। अगर मोटर तुरंत ठीक नहीं हुई और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो यह संकट गंभीर रूप ले सकता है।
ग्रामीण प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं ताकि गांव में फिर से पेयजल आपूर्ति बहाल हो और उनकी मुश्किलें खत्म हों।