नई दिल्ली, देश के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में केंद्र सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने का ऐलान किया है। संगठन के अखिल भारतीय अध्यक्ष के साईं रेड्डी ने साफ कहा कि किसान हित में लिए गए केंद्र सरकार के साहसिक निर्णय का किसान संघ स्वागत करता है। (The country’s farmers will stand with the government in complex situations: Bharatiya Kisan Sangh)
दरअसल, हाल ही में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और टैरिफ विवाद को लेकर किसानों के बीच चिंता का माहौल था। इस पर किसान संघ ने पहले ही सरकार को अपना मत भेज दिया था, जिसमें साफ कहा गया था कि कृषि क्षेत्र में जीएम बीज और उनके उत्पाद, डेयरी सेक्टर और मत्स्यपालन में अमेरिकी कंपनियों को अनुमति न दी जाए।
मोदी सरकार का साहसिक फैसला
एम. एस. स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान आईसीएआर में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि अमेरिकी कंपनियों को कृषि, डेयरी और मत्स्यपालन क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने पारंपरिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की भी बात कही। इस फैसले को किसान संघ ने देश के किसानों के हित में ऐतिहासिक कदम बताया।
‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ – अमेरिकी टैरिफ पर टिप्पणी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को लेकर साईं रेड्डी ने इसे “विनाश काले विपरीत बुद्धि” करार दिया। उन्होंने कहा कि इस टैरिफ से भारत को कोई बड़ी हानि नहीं होगी, बल्कि इससे स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और देश में बने सामानों की खपत बढ़ेगी।
रेड्डी ने बताया कि भारत कृषि प्रधान देश है और हम खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हैं। कृषि के माध्यम से देश की 46% आबादी को रोजगार और 18% जीडीपी का योगदान मिलता है। यही कारण है कि कृषि क्षेत्र, विकसित भारत बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता
हाथकरघा दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने हैंडलूम और कुटीर उद्योग को प्रोत्साहित करने की बात भी कही। उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों को संदेश दिया कि किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि इनके हितों के खिलाफ कोई भी व्यापार समझौता नहीं किया जाएगा।
इस बयान पर किसान संघ ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “दुनिया की इस जटिल परिस्थिति में देश का किसान सरकार की लड़ाई में हमेशा साथ खड़ा रहेगा।”
अमेरिकी कृषि उत्पादों के बहिष्कार की तैयारी
भारतीय किसान संघ अब अमेरिकी कंपनियों के खाद, बीज और कीटनाशक उत्पादों के बहिष्कार पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है। संगठन जल्द ही किसानों से अपील कर सकता है कि वे अमेरिकी कृषि आदान सामग्री का इस्तेमाल बंद करें और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें।